त्यौहार, विचार और शिक्षा की पूँजी

Posted by Sparsh Choudhary
February 11, 2017

Self-Published

कहते हैं व्यक्ति के विचार चुम्बक की तरह होते हैं , इसीलिए अक्सर हमें ऐसे लोग मिल ही जाते हैं जो हमारे जैसे सोचते हैं ,या शौक़ या रुचियाँ या दृष्टिकोण रखते हैं . त्यौहार की शॉपिंग मुझे अक्सर बोरिंग ही लगती है . पता नही क्यों . शायद त्यौहार के पीछे के मूल उद्देश्यों को हम कहीं पीछे छोड़ आते हैं और दुनियावी नक़ल में भागे जाते हैं .इसलिये.या फिर रिश्तों में सौदे और व्यावसायिकता का प्रवेश हो जाया करता है सामान्यतः इसलिए .वे परंपराएं और प्रचलन जो सच में ख़ुशी , सामूहिकता और परिवार की गर्माहट का एहसास दें सिर्फ वही भाती हैं मुझे .

पर इस बार ,जैसा मैंने कहा ,विचार खींचते हैं . इस शॉपिंग के दौरान यूँ ही चल पड़ी चर्चा ने एक शख्स से परिचय करवा दिया .जो हमारे पिता जैसे ही पिता थे . बेटियों को शिक्षा का तोहफा देने वाले .शिक्षा का ही निवेश करने वाले . हमारे पिता भी चाहते तो बिल्डिंग्स खड़ी कर सकते थे .ज़मीन या किसी और में पूँजी निवेश कर सकते थे पर जैसा उन अंकल ने कहा कि हम मिडिल क्लास वालों की पूँजी और संपत्ति बच्चे ही होते हैं . पापा कहते हैं कि भारत में गरीब से गरीब भी बेटी की शादी में लोन लेकर ,सब कुछ गिरवी रखके , जीवन भर की बचत को एक रात में खर्च देता है और फिर गर्व से बताता है कि उसने अपनी बिटिया की शादी धूमधाम से की . पढ़ाते टाइम पैसा नही है का रोना रोते हैं . कुछ को शिक्षा का महत्त्व नही समझता और अज्ञान के कारण वे समाज के दबाव में रह जाते हैं कुछ अमीर और बेहतर स्थिति वाले हैं तो भी उन्हें शान यहां नज़र आती है पर बेटी को बी ए ,एम ए करवा देते हैं ज़्यादा से ज़्यादा .और पकाना तो रोटी ही है. !!!

सब जानते हैं कि शादी ज़िम्मेदारी होती है और ज़िम्मेदारी की शुरुआत भी .और तिसपे लड़की कभी पढ़ नही पाती . शादी के बाद वो सोच भी नही सकती . फिर माँ और पिता ये क्यों नही समझते .मैंने ऐसे भी माँ बाप देखे हैं जिनकी खूबसूरत फैशन डिजायनिंग का कोर्स किये बेटियां जिनके कला के नमूने देख हम बचपन में आश्चर्य से भर उठते थे आज वो 20 लोगों के परिवार में चूल्हा फूंकती बैठी हैं . !!

शिक्षा और शिक्षा की नेमतें सब के लिए कामगार हैं पर लड़कियों को इसे औज़ार बना लेना चाहिए .माँ कहती हैं. खुद की ज़िन्दगी की नाव का चप्पू , आत्म सुरक्षा के लिए दिमाग को तेज़ करने वाला , मुसीबत के समय या वैसे भी समाज की नज़रों में बेटा बना देने वाला , आर्थिक रूप से खुद की पहचान बनाने वाला , दूसरी लड़कियों और समाज को रौशनी देने वाला , आत्मविश्वास और अपनी खुद की अलग सोच देने वाला .शिक्षा और उसकी ऐसी ही तमाम नेमतें औरत ज़ात जिसे दोयम और अति साधारण समझ जाता है ,उसे ख़ास बना सकती हैं .

त्यौहार पर जब ऐसे कुछ विचार टकरा जाएँ जिनमें आप और आप का परिवार विश्वास करता हो , तो अच्छा लगता है .पिछले दफे दीवाली पर एक पटाखे विक्रेता की कहानी सुनी थी जिन्होंने अपनी बेटी को ‘हेलीकाप्टर पायलट’ की ट्रेनिंग दिलवाई और उसे दिल्ली सिविल सर्विसेज की तैयारी करने भेजा. इतना ही नही इस श्रावण सोमवार को शिव तीर्थ स्थल से लौटते वक़्त अनायास स्वामी दयानंद जी के आश्रम और गौशाला जाने का अवसर मिला जहाँ के गुरुजी ने तर्क ,बुद्धि का प्रयोग कर सत्य और असत्य की परख करने को कहा .

त्यौहार इतने सार्थक हो जाएंगे ,यह सोचकर अच्छा लगा .

वैसे तर्क ,बुद्धि लगाइये , देखिये शिक्षा आपका ही भला करेगी .बेटी को पढ़ाके आप को किसी और समाज सेवा की ज़रुरत नही होगी क्योंकि वो एक निःस्वार्थ कार्य होगा . बेटे के लिए तो आप फूले नही समाते क्योंकि आप स्वार्थी हो जाते हैं . पर आज देख लीजिये , क्या आपका भ्रम टूट नही रहा है .बेटों के बदलते रूप . अब पैसा बोयेंगे तो बेटे में पैसा मोह कैसे न पाएंगे ?

प्यार और शिक्षा स्वार्थ से नही ,बेशुमार लुटाइये . पर व्यापारी नही , माँ पिता बनके .

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