देह मरती है विचार नहीं

Posted by Shailav Tyagi
February 23, 2017

Self-Published

देह मरती है विचार नहीं
#सिर्फ_देह_मरती_है
#विचार_नहीं

कौन कहता है कि नायक में बुराई नहीं हो सकती… व्यक्तित्व और व्यक्ति दो अलग विषय हैं
बिना नायक के तो खलनायक शब्द भी अधूरा है
हिटलर, कास्त्रो, सद्दाम को नायक मानने वाले भी मिल जाऐंगे, व्यक्ति वो चाहे कैसे भी हों मगर कुछ लोगों पर उनके व्यक्तित्व का प्रभाव तो था/है ही
जो कई लोगों का दुश्मन होता है कुछ लोगों का दोस्त भी तो होता है या यूं कहें कि कुछ लोगों का दोस्त होने की वजह से शायद उसके कई दुश्मन होते हैं
समस्या तब होती है जब वो अपने दोस्तों और दुश्मनों पर अपने विचार थोपने लगे यानि व्यक्तित्व पर व्यक्ति हावी होने लगे, तब नायक खलनायक हो जाता है
विचारों के घोड़ों को साध के रखना ही नायक की पहचान है, विचार बेलगाम हो जाते हैं तो नायक निरंकुश
नायक और विचारों का पतन यहीं से शुरू होता है

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