पंजाब राज्य के अंतिम चुनाव प्रचार चरण में राजनीतिक घटना कर्म तेजी से बदल रहे हैं.

Posted by हरबंश सिंह
February 1, 2017

Self-Published

साल १९९७ से लेकर २०१२, तक हुये ४ पंजाब राज्य चुनाव शांति पूर्ण माहौल में ही हुये थे, यहाँ राजनीति भाषण में एक दूसरे पर छीटा कशी ज़रुर हुई थी लेकिन कही भी कोई अप्रिय घटना नही हुई. इन चार राज्य चुनाव में अगर राजनीति पर ध्यान दे तो सिर्फ शिरोमणि अकाली दल बादल – भाजपा का राजनीति गठजोड़ या कांग्रेस की राज्य इकाई, यही दो राजनीतिक दल थे जिनके नाम पर एक मतदाता अपनी मोहर लगा सकता था.

यहाँ, एक बात का जिक्र करना जरूरी हैं की १९९७, आते-आते श्री प्रकाश सिंह बादल, शिरोमणि अकाली दल बादल के रूप में सिख राजनीति के सर्वोच्च नेता बन गये थे, इस समय सिख राजनीति में ऐसा कोई चेहरा नहीं था जो बादल को चुनौती दे सकता और इसी फलस्वरूप भाजपा के साथ इनका राजनीतिक गठजोड़,इन्हें देल्ही की राजनीति की सुख सुविधा से भी जोड़ रहा था, मसलन अगर पंजाब नहीं तो देल्ही, में सकता होगी और इसी के तहत राजनीतिक रूप से सुरक्षा की गारंटी हो जाती हैं, इसी की तर्ज पर, राज्य कांग्रेस इकाई भी एक ही दल शिरोमणि अकाली दल बादल से खुद को चुनौती देख रही थी और जब राजनीतिक रूप से एक ही विरोधी दल हो तो राजनीतिक सकता का रास्ता आसन हो जाता हैं. यहाँ,ये ५-५ साल का मैच की तरह थे  मसलन एक बार तुम राजनीतिक सकता का सुख भोग लो और एक बार हम इसका आनंद लेंगे. और इसी के तहत, किसी भी प्रकार की राजनीतिक घुटन नहीं थी.

लेकिन इस बार २०१७ के पंजाब राज्य चुनाव में आम आदमी पार्टी और इसी दल का सर्वोच्च नेता अरविंद केजेरीवाल,बादल परिवार और कांग्रेस की राज्य इकाई को चुनौती दे रहे हैं, मसलन पंजाब की राजनीति में दबाब बन रहा हैं और विज्ञान ये कहता हैं, की आसमानी बिजली तब ही गरजती हैं जब वातावरण में दवाब होता हैं, इसी के तहत, कल तारीख ३१-जनवरी-२०१७ को पंजाब की मोड़ मंडी में एक विस्फोट हो गया, जहां तीन लोगो की मोत हो गयी जिसमें एक नाबालिग भी था लेकिन नेता जी हरमिंदर जस्सी बच गये जो यहाँ, से कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं और ये सिरसा के विवादास्पद संत गुरमीत राम रहीम सिंह के व्यक्तिगत रिश्तेदार भी हैं, इनकी चुनावी सभा पूरी होते ही पास में खड़ी कार में ब्लास्ट हो गया, यहाँ चश्मदीद का कहना हैं की ब्लास्ट के पहले बंदूक की गोली चलने की आवाज आयी और बाद में कुछ ३ ब्लास्ट हुये.

अभी पुलिस छान बीन कर रही हैं लेकिन अक्सर हमारे देश में जब भी ब्लास्ट होता हैं तब-तब नेता जी बच जाते हैं और कुछ निर्दोष नागरिक ही मारे जाते हैं.और जांच में अक्सर शक की सुई, पड़ोसी देश पर अटक जाती हैं लेकिन हमारे देश के पड़ोसी देश हिंदू बहुसख्यंक नेपाल भी हैं और मुस्लिम बहुसख्यंक पाकिस्तान भी, लेकिन शक पाकिस्तान पर ही होता हैं, मसलन वहां बंदूक और बम का जकिरा होगा, लेकिन गूगल ये कहता हैं की वहा भी करोड़ी में लोग रहते हैं, खैर मुद्दे से नही भटकते, एक पंजाबी नागरिक होने के नाते ये मेरी चिंता का विषय हैं, शायद पंजाब में स्थापित हुई शांति के दो दशकों के बाद इस तरह का कोई ब्लास्ट हुआ हैं. में व्यक्तिगत रूप से इसे आतंकवाद से ना जोड़कर, राजनीतिक साजिश के रूप में ज्यादा देख रहा हु, लेकिन इस की तसल्ली तो पुलिस की फाईनल रिपोर्ट ही बता पायेगी की इस ब्लास्ट के पीछे किसका हाथ हैं ?

जैसे-जैसे पंजाब राज्य चुनाव की तारीख ०४-फेबुअरी-२०१७ नजदीक आ रही हैं, वैसे-वैसे राज्य के राजनीतिक घटना कर्म तेजी से बदल रहे हैं इसी के अंतर्गत सिरसा के विवादास्पद संत गुरमीत राम रहीम सिंह ने पंजाब राज्य चुनाव में शिरोमणि अकाली दल बादल –भाजपा के राजनीतिक गठजोड़ को अपना समर्थन देने की सार्वजनिक रूप से घोषणा की हैं , ये वही संत हैं जिन्होंने २००७ के पंजाब राज्य चुनाव में कांग्रेस को समर्थन देकर बादल परिवार के गढ़ में कांग्रेस को विजयी बनाया था, यहाँ ये बात का जिक्र होना चाहिये की बाबा पर सीबीआई की जांच चल रही हैं और अक्सर बाबा उसी दल को समर्थन करते हैं जिनकी केंद्र में सरकार होती हैं, यानिकी २००७ में कांग्रेस देल्ही की सकता में थी और आज २०१७  में भाजपा  देल्ही में विराजमान हैं. अब इस से एक आम नागरिक, ये क़यास तो ज़रुर लगायेगा की किस तरह राजनीति सीबीआई की जाँच को प्रभावित करती हैं. लेकिन तारीख ०१-फेबुअरी-२०१७, मतलब राज्य चुनाव की तारीख से सिर्फ ३ दिन पहले, बाबा ने इस समर्थन की घोषणा क्यों की ? ये सवाल, अपने आप में बहुत जवाब देता हैं, मसलन मोड़ मंडी में ब्लास्ट के कुछ ही घंटों के भीतर इस समर्थन की घोषणा हो गयी ? राजनीति, अक्सर कयासों का खेल हैं, यहाँ आप अंदाजा लगा सकते हैं लेकिन सच और झूठ, कभी भी सार्वजनिक रूप से नहीं कहा जाता. बस, चुनावी परिणाम ही ये तय करते हैं की कोन सा चुनावी पैंतरा सही था और कोन सा गलत.

खैर, चुनावी प्रचार आज कई माध्यम के जरिये हो रहा हैं, टीवी, अख़बार, नेता जी का बयान, डिजिटल मीडिया, सोशल मीडिया, इत्यादि लेकिन क्या देश का आम बजट भी, इसी प्रचार का माध्यम हो सकता हैं ? शायद, इस बार ऐसा होगा,आज तारीख ०१-फेबुअरी-२०१७ को हमारे वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली, संसद में इस साल का बजट पेश करेंगे, कुछ लोक लुभावने ऐलान हो सकते हैं और इसी बजट की रूप रेखा में आज और कल, अख़बार से लेकर टीवी, सोशल मीडिया, हर जगह इसी बजट पर खबर छपी होगी या चर्चा हो रही होगी, शायद ये बजट भी एक मतदाता और उसके चुनावी मत को प्रभावित कर सकता हैं. पहले भी, अक्सर केंद्र सरकार पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस, इत्यादि जरूरी चीजों की कीमत चुनाव आते ही कम कर देती थी लेकिन चुनाव के बाद अक्सर कीमतों में उछाल आता हैं, इसी के तहत, अक्सर ये भी देखा गया हैं की, राज्य पुलिस चुनाव की घोषणा के बाद, चालान कम ही काटती हैं लेकिन चुनाव के बाद इनकी गिनती अक्सर बड़ जाती हैं.

पंजाब, राज्य चुनाव २०१७, यहाँ आम आदमी पार्टी के मौजूद होने से और चुनाव की तारीख ०४-फेबुअरी-२०१७, नजदीक आने से, राजनीतिक घटना कर्म तेजी से बदल रहे हैं, हर तरह से, हर राजनीतिक पार्टी अपनी पोहंच हर आम और खास मतदाता के साथ कर रही हैं, यहाँ आचार संगीता कल शाम मतलब ०२-फेबुअरी-२०१७ को लागू हो जाने से, प्रचार के इन अंतिम पलो में, हर उम्मीद वार ओर राजनीतिक पार्टी अपनी मौजूदगी दर्ज करवाने का पूरा जोर लगा रही हैं, कही सभा हो रही हैं तो कही रोड शो, अब ये देखना होगा. की मतदाता इस अंतिम प्रचार में कितना प्रभावित होता हैं या ये पहले से तय कर चूका हैं, की इस बार किस राजनीतिक पार्टी को अपना वोट देना हैं. अगर इस राज्य चुनाव में  मतदान एक समान्य गिनती में रहा तो ठीक हैं लेकिन अगर बड़ी संख्या में मतदाता अपना मत का इस्तेमाल करेंगे, तो नतीजन बदलाव के संकेत हो सकते हैं. लेकिन परिणाम के लिये, ०४-मार्च-२०१७ तक का इंतजार तो करना ही होगा. धन्यवाद.

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