भारत बनाम अमेरिका चुनावी वादे………….

Posted by Janmejay Kumar
February 15, 2017

Self-Published

जब चुनाव सिर पर होता है और जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आते हैं तो मानों लोक-लुभावन वादों का अंबार लग जाता है। लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए सभी राजनीतिक पार्टियां अपने-अपने हिसाब से जाल बिछा कर चुनाव मैदान में शिकार करने उतरती है और इस जाल को नाम दे दिया जाता है “मेनिफेस्टो” यानी “घोषणा पत्र”।

इस घोषणापत्र में लोगों को लुभाने के लिए तरह-तरह के वादे किए जाते हैं। चुनाव से पहले ही तय किया जाता है कि अगर आप हमे वोट देते हैं तो आपको भी 20 रुपए किलो घी, चीनी ₹10 किलो और लैपटॉप, मोबाइल के साथ एक जीबी डेटा फ्री मिलेगा। इस 1 जीबी डाटा को आप संभाल कर प्रयोग कीजिएगा क्योंकि आपको सिम खरीदने के समय कंपनी दोबारा डाटा नहीं देगी।

लेकिन अगर हम बात करें अमेरिका की तो वहां राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का विरोध इसलिए हो रहा है क्योंकि उन्होंने चुनाव के दौरान किए अपने वादों को पूरा कर रहे हैं। वाइट हाउस पहुंचने के बाद वो अपने उन्हीं सिद्धांतों पर काम कर रहे हैं, जिनके लिए उन्हें जनादेश प्राप्त हुआ है। वह चाहे मेक्सिको सीमा पर दीवार बनाने की बात हो या फिर 7 मुस्लिम देश पर प्रतिबंध की बात हो ।

अब हम अपने देश भारत की बात कर लेते हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान असम की चुनाव प्रचार सभा में नरेंद्र मोदी हुंकार भरी थी कि सत्ता में आने के बाद अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों को बोरिया-बिस्तर समेत उनके देश भेज दिया जाएगा। 2 साल 9 महीने गुजर जाने के बाद भी मोदी जी  का ध्यान उस तरफ नहीं गया। इससे एक बात तो साफ़ है कि भारतीय राजनीति मे वादे तो सिर्फ चुनाव जीतने के लिए किए जाते हैं।

भारत-बांग्लादेश के संबंध में अमेरिका-मेक्सिको की समस्या की तुलना एक और नज़रिये से बेमानी है। क्योंकि कुल मिलाकर अमेरिका में 1 करोड़ 10 लाख मेक्सिको के लोग रहते हैं। जिनमें से आधे गैरकानूनी है। जबकि संसद गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू के बयान के मुताबिक भारत में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों की संख्या कम से कम दो करोड़ है। तो डोनाल्ड ट्रंप को गाली देकर हम अपनी नपुंसकता को क्यों छुपा रहे हैं?

जनमेजय कुमार

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