राजनीति में जातीवाद

Posted by Mithilesh Kumar
February 12, 2017

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आम तौर पर सभी राजनीतिक दल यह कहे फिरते है की हम जाती की राजनीती नहीं करते है पर राजनीतिक पार्टी ही जातिवाद का प्रमुख बढ़ावा देने वाली कारक है क्यू की ये लोग तो पार्टी गठन की शुरुआत ही जातिवाद से ही करते है ना जाने कितने प्रकार क्र प्रकोष्ठ बनाते है जैसे -अतिपिछड़ा , दलित, स्वर्ण ,आदि।

फिर शुरू करते है यही से जातिवाद को और बढ़वा और वोट में जातिवादता की की।

फिर अलग अलग इलाको में ये अलग अलग जाती के नाम पर भ्रामक अफवाह फैलाते है।फिर चुनाव आते ही टिकट भी जाती के आधार पर बाटते है।

टिकट मिलने के बाद हो जाती है असली जातिवादता का महासंग्राम ……

अगर सच में राजनीती पार्टी जातिवाद खत्म करना चाहती है तो सबसे पहले वह अपने दल में पल रही इस तरह के प्रकोष्ठ को खत्म करे।खैर यह पार्टी वाले नेता यह सब क्यू खत्म करेगे क्यू की इनकी पार्टी तो इसी पर चलती है।

चुनाव आयोग को इस पर पहल करनी चाहिए।नहीं तो जाती वाद कभी राजनीती से खत्म नहीं होने वाली है।

 

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