वाह रे लोकतंत्र! सरकार बचाने के लिए किडनैपिंग?

Posted by Nilesh Mishra
February 10, 2017

तमिलनाडु में ओ. पन्निरसेल्वम और शशिकला के बीच मुख्यमंत्री पद की रस्साकसी जारी है। पनीरसेल्वम खुद को ‘अम्मा’ का सबसे ख़ास बताने से नहीं चूक रहे हैं और खुद को उनका उत्तराधिकारी बता रहे हैं। वहीं शशिकला भी  मुख्यमंत्री बनने को तैयार बैठी हैं। कई नेता जो शशिकला का विरोध कर भी रहे हैं उन्हें साइड कर दिया गया है।

अब बात शक्ति प्रदर्शन पर टिकी है, जाहिर है इसके लिए विधायकों के समर्थन की जरूरत दोनों को है। इस मामले में लीड शशिकला ले चुकी हैं। बताया जा रहा है कि शशिकला ने 130 विधायकों को एक बस में बिठाकर किसी अज्ञात स्थान पर भेज दिया है। एक रिजोर्ट में ‘किडनैप’ किए गए इन विधायकों को किसी से मिलने या किसी से बात करने की इजाजत नहीं है। सारे टेलीफोन कनेक्शन काट दिए गए हैं और मोबाइल नेटवर्क बंद करने के लिए जैमर तक लगा दिए गए हैं।

ऐसे में सवाल यह उठता है कि ऐसी स्थिति में लोकतंत्र की रक्षा कैसे की जा सकती है? अगर 130 विधायक शशिकला के साथ ही हैं तो ऐसे कदम क्यों उठाए जा रहे हैं?  क्या ये उन विधायकों की निजता और स्वतंत्रता का हनन नहीं है? पुलिस या कोर्ट की जिम्मेदारी ऐसी स्थिति में क्या है? या वो ये इन्तजार कर रहे हैं कि कोई विधायक दबाव में कुछ अनुचित कर बैठे।

इस तरह विधायकों को उनका नेता चुनने की स्वतंत्रता ही छीनी जा रही है लेकिन आश्चर्य की बात है कि कोर्ट या अन्य कोई इस पर कोई प्रतिक्रया ही नहीं दे रहा है। वैसे इस तरह की घटनाएं भारत में नई नहीं हैं लेकिन अनुचित जरूर हैं।

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