जेल को जेल ही रहने दो! शशिकला

Posted by abhishek shukla in Hindi, Politics, Society
February 16, 2017

सत्ता के गलियारे सबको रास नहीं आते। सबके पास शासन चलाने का हुनर नहीं होता है। माना कि राजनीति काली कोठरी है जिसमें से कुछ नेताओं में बच कर निकलने का हुनर होता है, लेकिन हर कोई इस हुनर में उस्ताद भी नहीं होता है। शशिकला भी इससे पार नहीं पा सकीं।
अदालत में आत्मसमर्पण करने के बाद बेंगलुरु की सेंट्रल जेल में लौट आई अन्नाद्रमुक महासचिव वीके शशिकला।

उच्चतम न्यायालय ने आदेश दिया था कि वह चार साल की कैद की बाकी अवधि की सजा तत्काल काटें। अब उच्चतम न्यायालय है भाई,कोई म्युनिसिपैलिटी का आर्डर थोड़े ही है जिसकी कोई कद्र ही नही होती है। कानाफूसी सुनें तो शशिकला ने जेल की सेल में ए क टेबल, पंखा और हर हफ़्ते कुछ उडंत-चरंत और फुरंत भोजन के जुगाड़ कराने की जेल प्रशासन को अर्जी दी है। अब कौन इनकी बात सुने। जेल प्रशासन ने कुछ सुना ही नहीं। होगी कोई व्यक्तिगत दुश्मनी। अब भाई होने वाली थी मुख्यमंत्री लेकिन हो गई कैदी। अपनी-अपनी किस्मत।

एक अधिकारी ने तो यहां तक कह दिया है कि, “कोई भी खास सुविधा शशिकला को नहीं दी जाएगी।” बताओ जिसे सैल्यूट मारना था उसकी ख़्वाहिशें मारते हैं। उड़ती-फिरती ख़बरों की मानें तो शशिकला ने घर का बना खाना, मिनरल वाटर और एक स्पेशल टॉयलेट की मांग जेल प्रशासन से की है। एक अधिकारी का कहना, “यह कैसे संभव है? शशिकला ने हमसे अभी तक इसके लिए संपर्क नहीं किया है।”

सुप्रीम कोर्ट से राहत न मिल पाने के बाद शशिकला सड़क मार्ग से कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरू के लिए चेन्नई की ओर मुड़ी थीं लेकिन लास्ट टाइम पर धोखा हो गया। शशिकला परप्पना अग्रहारा में सेंट्रल जेल में ही बनाई गई अदालत में चली गई। यह जगह कर्नाटक-तमिलनाडु सीमा पर होसुर से 28 किलोमीटर दूरी पर है। असल में बेंगलुरु के अदालत वाले रूम को सुरक्षा कारणों से परप्पना अग्रहारा के केंद्रीय जेल में बदल दिया गया था। वहीं शशिकला ने आत्मसमर्पण किया। अधिकारियों की मानें तो अदालती फार्मैलिटी पूरी करने और मेडिकल चेकअप के बाद शशिकला को सलाखों के पीछे डाल दिया गया। न्यायाधीश ने भी आत्मसमर्पण के वास्ते दो सप्ताह का और वक्त देने और घर के खाने की इजाजत देने से इनकार कर दिया था।

बेंगलुरु के लिए निकलने से पहले रास्ते में वे जयललिता की समाधि पर गई और माथा टेका। माथा टेकने के बाद शशिकला ने कहा कि उन्होंने ‘षडयंत्र और विश्वासघात’ से जीतने के लिए ‘बड़ी शपथ’ ली है। अब शपथ क्या है ये तो चाहे अम्मा बता सकती हैं या चिनम्मा? अम्मा क्या बताएंगी जब मामला इस लोक का है।

अब शशिकला उसी जेल में फिर से पहुंची हैं जहां आय से अधिक संपत्ति मामले में सितंबर 2014 में निचली अदालत के दोषी करार दिए जाने के बाद तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता और उनके रिश्तेदारों वी के सुधाकरन एवं जे इलावरासी ने तीन सप्ताह जेल में बिताए। अब इसे जेल क्या कहें तीर्थ स्थल से कम थोड़े ही है यह पवित्र भूमि। ख़ैर ऐसी राजनीतिक उठा-पठक कम देखने को मिलती है। देखते हैं कौन बाहर आता है और कौन अंदर जाता है? सर्कस शुरू हो गया है,आप भी देखते रहिए।

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