नया घर तो खरीद लें पर पुराना बेचें कैसे?

Posted by Youth Ki Awaaz in Business and Economy, Hindi
February 7, 2017

अभिनव शाह:

“दो दीवाने शहर में, रात में दोपहर में,आबु दाना ढूंढते हैं…”, ये गाना उन लोगों पर सटीक बैठता है जो महानगरों में घर खरीदने की सोच रहे हैं। 1 फरवरी को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बजट पेश किया। लीक से हटकर इस बार फरवरी के पहले ही दिन बजट पेश हो गया। हां…हां रेल बजट भी साथ में पेश हुआ। ये अलग बात है कि रेल बजट वाला अहसास नहीं हुआ। खैर निजी तौर पर मेरा मानना है कि बजट को लॉलीपॉप डे मानने की पुरानी परंपरा अरुण जेटली ने खत्म करने की कोशिश की है।

बजट में इनकम टैक्स को लेकर जो कुछ हुआ उसका ज्ञान आपको अखबारों में मिल चुका होगा। खैर वित्त मंत्री ने हाउसिंग सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए बजट में कुछ घोषणाएं की हैं, ताकि सबको घर मिल सके। 2022 तक सबको घर देने का वादा जो प्रधानमंत्री मोदी ने किया है। अब आपको बताते हैं रियल एस्टेट सेक्टर की असली हकीकत, नोटबंदी के बाद इस सेक्टर की बैंड बज गई है।

बजट में अरुण जेटली ने 3 लाख से ज़्यादा नगद लेन-देन पर टैक्स लगा दिया है। अब राजस्व सचिव हसमुख अढिया ने तो यहां तक कह दिया है कि अगर 3 लाख रुपये से ज़्यादा का नगद लेन-देन किया, तो जितने का लेन-देन किया उतना ही जुर्माना देना होगा। समझे…नहीं समझे तो उदाहरण से समझिए। मसलन आपने किसी से 4 लाख रुपये कैश में लिए तो 4 लाख रुपये ही जुर्माना होगा।

अब सोचिए जिस किसी शख्स ने 4-5 साल पहले नोएडा एक्सटेंशन में अपना घर बुक कराया हो भले ही उसने अपने रहने के लिए बुक करवाया हो, लेकिन किसी मजबूरी में उसे घर बेचना पड़े, तो वो कैश में लेनदेन करने से कतराएगा। क्योंकि सिर्फ 3 लाख रुपये तक ही वह कैश ले सकेगा, बाकी अमाउंट का उसे ट्रांजैक्शन दिखाना होगा। और अगर अकाउंट में उतने पैसे आए तो सरकार उसे आपकी आय मानेगी और उसी हिसाब से टैक्स लग जाएगा।

ऐसे में पुराना घर बेचने वालों के लिए सरकार ने 3 लाख रुपये की एक दीवार खड़ी कर दी है। हां नए घर खरीदने के लिए आपको पहले के मुकाबले कम ब्याज पर लोन मिल रहा है, रेट घटने से फ्लैट के दाम भी घट गए हैं। लेकिन उन लोगों के सामने जो पुराने घरों को बेचना चाह रहे हैं ऑप्शन यही बचा है कि जो रुपये पहले एजेंट को देते थे, अब उसे सरकार को दे दो टैक्स के रुप में।

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