स्ट्राइक की वजह से ओला ऊबर की कैब सड़क से नौ दो ग्यारह

Posted by Rohit Singh in Hindi, Society
February 13, 2017

किसी भी बड़े शहर में अंजान व्यक्ति के लिए ओला और ऊबर जैसी कैब सेवाएं एक पथ के साथी के रूप में काम करती हैं। लेकिन अब शायद साथियों का साथ हमें महंगा पड़ सकता है। 10 फरवरी से ओला और ऊबर के दिल्ली एनसीआर के लगभग 3000 ड्राइवर धरने पर बैठ चुके हैं। कैब से सफर करने वाले लोगों के लिए यह एक बुरी खबर है। इसका आलम जंतर-मंतर व अन्य जगहों पर बखूबी देखने को मिला।

ओला और उबर कैब के लगभग 3000 ड्राइवर  हड़ताल पर हैं। इस वजह से जनता को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दिल्ली के सर्वोदय ड्राइवर एसोसिएशन के ड्राइवरों ने हड़ताल का फैसला किया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष कमलजीत गिल और उपाध्यक्ष रवि राठौड़ भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। ड्राइवरों का कहना है कि उनकी कमाई शरुआत में कंपनी द्वारा बताई गई कमाई से बहुत ज़्यादा घटती जा रही है और इंसेंटिव भी मिलना अब बंद हो गया है।

एसोसिएशन के वरिष्ठ सदस्य कमल राठौड़ ने अपने ड्राइवर साथियों को संबोधित करते हुए कहा कि, “हमें एक लाख रुपए महीने की कमाई होने की बात में फंसा कर काम पर रख लिया गया था। लेकिन अभी ये हाल हो गया है कि अपने परिवार का पेट पालना मुश्किल हो गया है।” उन्होंने कहा कि, “हम ये चाहते हैं कि सरकार की तरफ से जो 21 रुपए प्रति किलोमीटर की दर से भुगतान प्रस्तावित है उसी के हिसाब से भुगतान होना चाहिए। राठौड़ ने कहा कि पूल और राइड शेयरिंग में हमें बिल्कुल भी मुनाफा नहीं मिलता है अतः इसको बंद करना चाहिये।”

हाल ही में दिल्ली के वसंत विहार इलाके में बीएमडब्लू कार ने ऊबर टैक्सी को टकर मार दी थी, जिसमे चालक नस्सल इस्लाम की मौत हो गई थी। उसकी पत्नी और दो बच्चे अब अकेले पड़ गए हैं। इसके सन्दर्भ में ड्राइवर एसोसिएशन ने ऊबर कंपनी से मुआवजे की मांग की है।

एसोसियेशन की मांग है कि ऊबर व ओला को अपने पास लिमिटेड गाड़ियां ही रखनी होंगी। कम से कम पांच साल तक नई गाड़ियों को लाना बंद करना होगा जिससे वे अपनी गाड़ियों की किश्त आसानी से भर सकें।

इन सबसे आम जनता को बहुत ही परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जंतर-मंतर के आस-पास से जो भी ओला व ऊबर की कैब निकल रही है, उसे रोक कर उस गाड़ी की हवा निकाल दी जा रही है और ड्राइवर को माला पहनाकर हास्यास्पद सम्मान किया जा रहा है। रास्ते में कैब रोक दिए जाने से जनता इतनी परेशान हो गई कि बीच रास्ते में उन्हें कैब छोड़ कर ऑटो से जाना पड़ा। धरनाकर्ता अपने फ़ोन से जबर्दस्ती कैब बुक करके ड्राइवर को जंतर-मंतर पर बुला कर उसको धरने में शामिल होने पर मजबूर कर रहे हैं। ये किसी भी व्यक्ति या ड्राइवर की स्वतंत्रता के साथ बहुत बड़ा खिलवाड़ हो रहा है। अपनी मांग मनवाने व ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को धरने में शामिल करने का ये तरीका बहुत ही हास्यास्पद है।

रोहित Youth Ki Awaaz हिंदी के फरवरी-मार्च 2017 बैच के इंटर्न हैं।

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