BHU शोध छात्रा का अपने गाइड पर सेक्शुअल हरासमेंट का आरोप

Posted by Vikas Singh in Campus Watch, Hindi
February 6, 2017

नोटYouth Ki Awaaz ने इस मामले पर BHU के VC प्रोफेसर गिरीश चंद्र त्रिपाठी से बात की। VC ने पहले तो कहा कि ऐसे बहुत से केस आते हैं, मुझे याद नहीं। हमने जब केस याद दिलाया तो उन्होंने बताया कि संबंधित विभाग को मामले में जांच और कार्रवाई के आदेश दिए जा चुके हैं। दोषी पर कार्रवाई होगी।


हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का नारा दे रहे हैं। दूसरी तरफ उनके ही लोकसभा क्षेत्र बनारस में स्थित देश के सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में बेटियों (छात्राओं) की स्थिति दोयम दर्जे की बनी हुई है।

हाल में रसायन शास्त्र विभाग में एक शोध छात्रा ने अपने पीएचडी सुपरवाइज़र पर सेक्शुअल हरासमेंट का आरोप लगाया है। छात्रा ने 25 जनवरी को BHU के VC, और चीफ प्रॉक्टर को लिखित शिकायत दर्ज कराकर कार्रवाई की मांग की है।

लेकिन छात्रा की माने तो आरोपों की जाँच करने की बजाय यूनिवर्सिटी प्रशासन की तरफ से केस वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है। प्रॉक्टोरियल बोर्ड के अधिकारियों ने मीडिया में ये खबर कैसे गई इसपर भी छात्रा से ही सवाल किया।

जिस समय यूनिवर्सिटी प्रशासन को छात्रा के साथ होना चाहिए था उस वक्त वो छात्रा पर मामला वापस लेने का दबाव बना रहा था। यूनिवर्सिटी की महिला सेल में शिकायत और सुनवाई के दौरान भी छात्रा से असहज करने वाले सवाल ही ज़्यादा पूछे गए।

शिकायत दर्ज होने के बाद दस दिन से अधिक का समय गुज़र गया परन्तु अभी आरोपी प्रोफेसर पर कोई कार्रवाई नहीं की गयी है। उल्टा VC समेत पूरा प्रशासनिक अमला आरोपी प्रोफेसर को बचाने में जुटा है।

वर्तमान VC प्रोफेसर जीसी त्रिपाठी पर बलात्कार के आरोपी को यूनिवर्सिटी में अच्छे पद बैठाने का भी आरोप है। BHU के सर सुन्दर लाल चिकित्सालय के वर्तमान चिकित्सा अधीक्षक ओपी उपाध्याय को ‘फिजी’ की मजिस्ट्रेट कोर्ट और हाइकोर्ट ने 21 वर्षीय युवती के फिजी में बलात्कार के प्रयास के केस में डेढ़ साल के कारावास और 1500 डॉलर के जुर्माने सजा सुनाई है।

कोर्ट के फैसले की कॉपी फिजी की सुवा हाइकोर्ट के वेबसाइट पर ऑनलाइन उपलब्ध है, वह फिजी
में भगोड़े घोषित हैं। यह मामला VC और विश्वविद्यालय प्रशासन के संज्ञान में भी है, लेकिन VC उन्हें हटाने की बजाय चिकित्सा अधिकारी से उनकी पदोन्नति कर उन्हें चिकित्सा अधीक्षक बना दिया।

ऐसे ही पिछले साल 13 जुलाई को घटित घटना ने पूरे कैम्पस को हिला कर रख दिया। BHU के MA. हिंदी विभाग के एक छात्र के साथ अप्राकृतिक दुष्कर्म और गैंगरेप का मामला सामने आया। और आरोपी के तौर पर विश्वविद्यालय के ही एक कर्मचारी के शामिल होने की बात सामने आयी। शुरूआती दौर में विवि प्रशासन द्वारा मामले को दबाने का प्रयास किया गया। घटना के तेरह दिन बीत जाने के बाद कोई कार्यवाही न होता देख जब छात्र सड़क पर उतरे तो आरोपी को BHU से ससपेंड किया गया। उक्त घटना में मुख्य आरोपी के साथ चार अन्य लोग भी शामिल थे परंतु उनका अभी तक कुछ पता नही चला।

वर्तमान में शोध छात्रा के साथ हुई घटना में भी प्रशासनिक लीपापोती का प्रयास किया जा रहा है, अगर छात्रों द्वारा एकजुट होकर घटना का प्रतिवाद और प्रतिरोध नहीं किया गया तो छात्रा न्याय से वंचित रह जायेगी और आरोपी प्रोफेसर कानून पर हंसता हुआ घूमता रहेगा।

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