तुझ बिन फागुन में फाग नहीं रे.. ओ माल्या तेरे बिना…

Posted by Sunil Jain Rahi in Hindi
February 24, 2017

हे सखी फागुन आयो। सब के सब बौरा गऐ। आम के बौर आए और आम के साथ-साथ खास भी बौरा गए। खेतन में फसल भी बौरा गई। ऑफिसन में अधिकारी/कर्मचारी बौरा गए। (मार्च में पुराना बजट समाप्त कर नये बजट की शुरूआत जो होती है।) फागुन में सब के सब बौरा जात हैं। नेता तो पहले बौराए पांच राज्यन में घूम रहे हैं। हर कोई बौराय रहो है। चुनाव में फूली जनता का अब बौरापन धीरेःधीरे कम हे रहो है। प्रकृति में पेड़, पत्ता, घास फूंस और तो और गधा तक बौरा गए। अब तो लगत है कि आगरा का अस्पताल उ छोटों पड़न लगो है।

इस फागुन में काउबेल्ट (कृष्ण का क्षेत्र) रस भंग और रस रंग के साथ फाग खेलने उतरेगा। सभी रंगों के रंग में भीग जाएंगे, सराबोर हो जाएंगे, तन भी भीगे, मन भी भीगे और भीगेगी चुनरिया। ऐसा पहली बार हो रहा है, फागुन में चुनाव परिणाम आने वाले हैं। चुनाव परिणाम हो और फागुन न हो तो भी फागुन आ जाता है, लेकिन इस बार तो फागुन और चुनाव परिणाम दोनों साथ-साथ आ गए हैं।

पूरा इलाका फागमय हो गया है। नोटबंदी का असर कम हो गया है। काला धन फिर से जमा करने की होड़ लग गई है। कुछ चोर अब भी साहूकार बने बैठे हैं। आर.बी.आई के आसपास आज भी पुराने नोट कमीशन पर चल रहे हैं। फागुन में पुराने चलन को समाप्त कर नये चलन की शुरूआत अभी तक बरकरार है। फागुन में सभी मस्ता रहे हैं। विदेशी पर्यटक मथुरा की और दौड़ने लगे हैं। बरसाने की लड़कियां लाठियां भांजने की प्रक्टिस करने लगी हैं। लेकिन सखी एक बात का दुख साल रहा है।

फागुन आया, चुनाव आया, होली आई, परिणाम आने वाला है, लेकिन हमरे कन्हैया की वापसी नहीं हो रही है। बिन कन्हैया की वापसी के फाग कैसे खेला जाएगा। कैसे नालियों में लोटा जाएगा, कैसे रंग-रंग में मिलाकर पानी को सरूर में बदला जाएगा। हां सखी मैं मल्या श्री की बात कर रही हूं।

का करूं सजनी आये न बालम। अब तो आ जाना चाहिए।

हे श्री मल्या अब घर आ जाओ। आपको कोई कुछ नहीं कहेगा। आपकी सम्पत्ति हमने मिल बांट कर खा ली है। तुम्हारी दारू की फैक्ट्री पर अब उल्लू साहब बैठकर पुरानी बोतलों में बची खुची दारू निकाल-निकाल कर पी रहे हैं। अदालत और सरकार तुम्हारी वापसी की पुरजोर कोशिश में लगी है। एक-दूसरे को नोंचने में लगे हैं। मल्या श्री को वापस लाओ तभी फाग खेला जाएगा। तुम्हारे बार-बार न आने के इरादे से सभी परेशान है। बेटा अब तुमसे कोई कुछ नहीं कहेगा। अब तो सब अपनी-अपनी कांच बचाने में लगे हैं। तुम्हारी कांच खोलने की हिम्मत किसी में नहीं है। तुम तो हमारे आदर्श हो, तुम्हीं हमें मार्ग दिखाने वाले और मार्ग प्रशस्त करने वाले हो। तुम्हारे बिना कैसे फाग कैसे खेला जाएगा। तुम्हारे बिना यहां सभी व्याकुल हैं।

हे मल्या! तुम्हारे न आने से अधिकारी मौन हो गए हैं। बाबू फाग न खेलने की कसम खा रहे हैं। चपरासी खाली बोतलों से खेलने की तैयारी में जुटे हैं। दीवारों पर पिछले साल के हीरोइनों के पोस्टर पुराने पड़ चुके हैं। पुराने पोस्टरों को ही देख-देख कर सभी नम आंखों से फाग का नहीं तुम्हारा इंतजार कर रहे हैं। तुम्हारा न आना सभी के लिए फाग न होने जैसा लग रहा है। तुम्हारी कार्यकुशला के प्रशिक्षण के लिए नये-नये संस्थान खोले जा रहे हैं। उनमें तुम्हारे व्याख्यान के लिए बच्चे इंतजार कर रहे हैं। बैंक के अधिकारी/बाबू/किसान/व्यापारी/बेरोजगार और नेता श्री भी उस क्लास में तुम्हारे लेक्चर का इंतजार कर रहे हैं। कैसे बैंकों से ऋण लिया जा सकता है। बैंक ऋण लेने में किन-किन का सहयोग जरूरी है। बैंक ऋण के कौन से कागजात जरूरी होते हैं। सम्पत्ति को कैसे बनाया जाता है और कैसे अपने नाम कराया जाता है। कैसे दारू से अरब पति और हवाई पति बना जा सकता है। सभी तुम्हारे लेक्चर के लिए तरस रहे हैं।

आम आदमी बौखला रहा है। तुम्हारे रहने से देश की उन्नति/अधिकारियों की उन्नति/बाबुओं की उन्नति/बैंकों की उन्नति के साथ-साथ हमारे तथाकथित उन सेवकों की उन्नति जो लाखों रूपये महीने वेतन पाते हैं और फिर भी बाबुओं की तरह लाईन में खड़े हैं कि हमारी तनख्वाह बढ़ाओ। तुम्हारे न रहने से लोगों का बुखार उतरने लगा है। आफिस की दीवारें नये केलेन्डरों के लिए तरस रही हैं। अधिकारी मायूस हो फाइलों को दबाये पड़े हैं, अधिकारी के कमरे में जाने का उत्साह समाप्त हो गया है।

हे मल्या श्री अब आ भी जाओ। जो होना था हो गया। फागुन आया लेकिन तुम नहीं आए। तुम्हारे बिना फागुन फीका-फीका लग रहा है। अब तो तुम्हारे बुलाने के लिए जज साहब भी आतुर लग रहे हैं। (नोटिस जारी हो रहे हैं।)
हे मल्या श्री यह सनसनी आज तक तुम्हारे मार्गदर्शन के लिए तरस रही है कि विदेश जाने की सही सोच सही समय पर कैसे आपकी नीति का हिस्सा बनी।

हे मल्या श्री इस फागुन में हमें बिरह की अग्नि में मत जलाओ और एक बार जरूर आ जाओ। तुमसे कोई कुछ नहीं कहेगा। हे मल्या श्री बैंक वाले कुछ नहीं कहेंगे, न पुराना हिसाब मांगें, न अधिकारी कुछ कहेंगे, पुलिस वाले तुम्हारे इंतजार में हैं तुम आओ सुरक्षा का तंत्र कड़ा किया जाए। अभी तो सुरक्षाकर्मी गेट पर पिए हुए पड़े तुम्हारा इंतजार कर रहे हैं। सुरक्षा करें तो किस की। हम तो केवल आपकी सुरक्षा कर सकते हैं।
किसी भी सज्जन को श्री मल्या श्री की आने सूचना मिले तो वाट्सअप/फेसबुक/ट्विटर पर अवश्य बतायें। स्वागत द्वार तैयार है, हम आपके इंतजार में पलकपावड़े बिछाये बैठे हैं।

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