ऐसी जगह जहां हर बस्ती में बसती है इनकी हंसी

Posted by Ruchi Roy
March 22, 2017

Self-Published

“गांव की लड़कियों को ज्यादा पढ़ना-लिखना नसीब नहीं होता है, इसीलिए हम इनकी शादी करा देते हैं।”
“दीदी मैं बड़ी होकर Hip-Hop डांसर बनना चाहती हूं।”
“अरे यार, इन लड़कियों को घर से बाहर नहीं भेजना चाहिए, वरना कुछ बुरा होते वक़्त नहीं लगता।”
“मुझे अपने पैसों पर ज़िन्दगी जीनी है, किसी और के नहीं। इसीलिए मैं नर्स बनना चाहती हूं।”

आप सोच रहे होंगे की ये सब तो बड़ी कॉमन बातें हैं और वैसे भी गांव में तो ऐसा ही होता है। लेकिन नहीं इस बार ऐसा नहीं हुआ। मैं इस बार उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव में गयी जहां मैंने बड़ी ताकतों को तैयार होते देखा। अनूपशहर, बुलंदशहर के पास का एक गांव जहां है परदादा परदादी एजुकेशनल सोसाइटी (Pardada Pardadi Educational Society-PPES)। दिल्ली से PPES के शूट के लिए निकलते वक़्त मेरे दिमाग में एक नार्मल NGO वाली इमेज थी। चौकोर दीवारों के अंदर कुछ बच्चे, निक्कर पैंट में ज़मीन पर बैठ कर पढ़ाई कर रहे होंगे।

“Good Morning Ma’am”
“What is this sir? Is this a drone with camera in it?”
मैं मुँह बाएँ खड़ी रह गई। किसी पब्लिक स्कूल में पढ़ने वाली लड़की की तरह यूनिफार्म में खड़ी लड़की के मुँह से ड्रोन का नाम सुन कर मैं समझ गयी- Never Judge a book by its cover.”

PPES चलाते हैं- विजेंदर (Sam) सिंह। ये तक़रीबन 75 साल से भी ज़्यादा उम्र के हैं लेकिन एक शिक्षक का जज़्बा, एक पिता का कर्तव्य और एक चलते जिस्म का हौसला इनकी उम्र को साझा ही नहीं कर पाता। अमेरिका की नागरिकता मिलने के बावजूद ये खुद को अनूपशहर वाला ही बताते हैं।

वहां एक अलग सी मस्ती थी उस स्कूल में। अगर Feminism का उदहारण दिया जाये तो वहां की लड़कियां किसी भी feminist activist से कम नहीं हैं। गांव में शूट करते वक़्त एक शराबी हमारे सर के साथ बदतमीज़ी करने लगा। सर ने तो कोई जवाब नहीं दिया क्योंकि वहां एक इंसान था जिसे पता था कि क्या करना है।

“ए, मेको विजेंदर का घर का पता अंग्रेजी में बता।”
“आप जाओ यहाँ से ये लोग मेरे घर शूट करने आये हैं।”
“नहीं तू स्कूल जाती है ना, इसको बोल विजेंदर का पता बताये।”
” ये बेवड़े, निकल तू यहाँ से, समझ नहीं आ रहा तुझे, यहाँ बाहर से लोग आएं हैं और तुम भरी दोपहर शराब पीकर घर में घुस आये।”

वहां कम से कम बीसियों खड़े थे, लेकिन सब चुप। उस रचना ने सबकी बोलती बंद जो कर दी थी। ये हैं गांव की लड़कियां।
सलाम है मेरा Sam को जिन्होंने रचना जैसे बच्चियों को सपने देखने की जगह और सच करने की ताकत दी।

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