क्या वाकई में इ.वी.ऍम. मशीन की प्रामाणिकता पर सवाल नहीं उठाये जा सकते.

Self-Published

२०१७ के ५ राज्य में हुये चुनाव के परिणाम आ चुके हैं और कई राजनीतिक पार्टी और नामी नेता अपनी हार का कारण इ.वी.ऍम. मशीन से हुई छेड़छाड़ को बता रहे हैं. इसमें आप के शीर्ष नेता अरविंद केजेरिवाल, बसपा की मायावती शामिल हैं वही सपा के नेता श्री अखिलेश यादव जी ने भी इसमें अपनी हामी भरी हैं. कई ऐसे आरोप पिछले समय में भी लगते रहे हैं मसलन २००४ के लोकसभा चुनाव के परिणाम के पश्चात श्री लालकृष्ण आडवाणी ने भी कुछ ऐसी ही टिप्पणी की थी.

वही श्री सुब्रमनियन स्वामी जी ने सुप्रीम कोर्ट में इ.वी.ऍम. वोट प्रणाली के खिलाफ याचिका दर्ज की थी इनका कहना था की इ.वी.ऍम. में वोट देने को बात मतदाता को ये किस तरह पता चलेगा की उसका वोट किस विधायक या पार्टी को गया हैं. यहाँ इनका ये भी कहना था की इ.वी.ऍम. मशीन को हैक भी किया जा सकता था. यहाँ, सुप्रीम कोर्ट ने अपनी सहमती भी स्वामी के हक में दी थी जहाँ फैसला दिया गया की इ.वी.ऍम. मशीन के साथ वोटर वेरिफिअब्ल पेपर ऑडिट ट्रेल (वी.वी.पी.ऐ.टी.) लगाया जाये जहाँ मतदाता इ.वी.ऍम. में अपनी वोट देने का बाद एक प्रिंट कागज़ में ये देख पायेगा की ये वोट किसको गया हैं और ये पर्ची चुनाव आयोग के अधीन संभाल कर रखी जायेगी, जिस से शंका के समय इनकी भी गिनती की जा सकती हैं.

लेकिन, आज सवाल ये उठ रहा हैं की इ.वी.ऍम. मशीन के साथ छेड़छाड़ हो सकती हैं और चुनावी परिणाम पर इसका प्रभाव भी हो सकता हैं. लेकिन चुनाव आयोग के कई वरिष्ठ अधिकारी और सरकारी पक्ष इस तरह के आरोप से अपनी असहमति प्रकट कर रहे हैं. लेकिन, यहाँ इसका विश्लेषण होना चाहिये की क्या सच में इ.वी.ऍम.  मशीन से किसी भी तरह की छेड़छाड़ मुमकिन नहीं हैं.

इ.वी.ऍम. को पहले मशीन की तरह व्याख्यान करने की जरूरत हैं. हम इंसान या क़ुदरत के सारे जीवित प्राणी, जानवर,पंछी, इत्यादि अपने जीवन के अनुसार और तकलीफ के मध्यनजर, फैसला लेने की बुद्धि या सोच रखते है, मसलन अगर रास्ता खराब हो तो इंसान ये ज़रुर सोचेगा की रास्ता बदल कर या और किसी उपाय के तहत सफर किया जाये या यही रुका जाये,  इसी के तहत बारिश में किसी परीँदै को उड़ता देखना मुश्किल हैं. यहाँ, हर जीवित प्राणी, जीवन के अनुसार अपने फैसले ले सकते हैं.

वही मशीन, दिये गये निर्देश पर कार्यवंती होती हैं, अगर बहुत से साधारण, से शब्दों में इसका उदाहरण दिया जाये तो साइकिल, इसे चलाने के लिये पैडल मारना पड़ेगा, वही इसका ब्रेक लगाने से इसे रोका जा सकता हैं, वही दूसरे वाहन को चलाने के लिये गाडी को गियर में डालकर चलाया जाता हैं और ब्रेक के तहत रोका गया. इसी तरह रसोई में गैस की सिगड़ी, इसे चलाने के लिये बटन दबा कर शुरू किया जाता हैं और फिर आग की सलाई से आग लगाई जाती हैं. और इसे बंद करने के लिये, बटन बंद किया जाता हैं.

अब, एक बच्चे की या एक नादान की इस मशीन से मसलन रसोई गैस की सिगड़ी तक पहुच हो जाये, वह बटन दबाकर,गैस को सिलिंडर से बाहर निकलना शुरू कर दे लेकिन आग अगर कुछ समय मसलन ५ मिनिट के बाद लगाये तो यकीनन हादसा हो सकता हैं, इसी के तहत भूतकाल के समय में कई ऐसे हादसे एक अपराध की तहत किये गये हैं उदाहरण के लिये अगर साइकिल के ब्रेक में से रबड़ निकाल दिया जाये, तो यकीनन साइकिल रुकेगी नहीं और हादसा हो सकता हैं,इसी के तहत इ.वी.ऍम. भी एक मशीन हैं, ये दिये गये निर्देशों पर ही काम करती हैं लेकिन अगर यहाँ इन निर्देशों को किसी निजी स्वार्थ के तहत बदल दिया जाये तो यकीनन परिणाम की इमानदारी पर सवालिया निशान तो लग ही सकता हैं.

अगर में कल्पना, करू तो इस मशीन में इलेक्ट्रानिक सर्किट लगी होगी, एक प्रोसेसर होगा और वोटिंग हुई गिनती को स्टोर करने के लिये किसी तरह से भी छोटी हार्ड डिस्क या मैमोरी स्टोरेज उपकरण लगाया गया होगा और परिणाम को दिखाने के लिये किसी तरह का डिस्प्ले लगा होगा. यहाँ, किसी ना किसी कंप्यूटर प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के तहत, इस मशीन मैं सौफ्टवेअर डाला गया होगा, जो इस मशीन को निर्देश देने का काम करेगा की किस समय क्या करना हैं मसलन वोट का बटन दबाने के समय, इसकी गिनती पार्टी उम्मीदवार या विधायक के रूप में मैमोरी में स्टोर करनी हैं, अगर वोट देने में किसी तरह की भी दिक्कत आ रही है तो यकीनन ये मशीन किसी तरह से अपनी खराबी को दर्शाती होगी, लेकिन वह भी दिये गये दिशा निर्देश पर अनुसार ही. अब, अगर ये मशीन किसी भी तरह से किसी अपराधी व्यक्ति की पहुच में आ जाये तो यकीनन इस सौफ्टवेअर या मैमोरी स्टोरेज, डिस्प्ले, इलेक्ट्रानिक सर्किट, इत्यादि किसी एक से भी छेड़छाड़ किया जाना, किसी भी तरह से नामुमकिन नहीं हैं.

आज भारतीय सरकारी वर्ग पर अक्सर भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहते हैं, यहाँ एक आम सी बात प्रचलित हैं की जिस बैंक में करोड़ो का लेन-देन होता हो वहां भी पानी का ग्लास और लिखने वाला पैन, चोरी के डर से किसी ना किसी रसी से बाँध कर रखा जाता हैं,  अब, जब भ्रष्टाचार इस हद तक समाज में पनप चूका हैं तो किसी भी सरकारी मशीन से छेड़छाड़ कोई चौंकाने वाला सवाल नहीं होना चाहिये. वही, इस मशीनी युग में, जहाँ मालिशिया का विमान ऍम.एच्.३७० को पूरी दुनिया की तकनीक मिलकर भी खोज नहीं पायी, वहां इ.वी.ऍम. मशीन की प्रमाणिकता पर मोहर लग जाये ऐसा हो नहीं सकता.

व्यक्तिगत रूप से इन चुनाव में आम आदमी पार्टी का पंजाब में हार जाना और इनसे ज्यादा वोट अकाली दल भाजपा गठजोड़ को मिलना, ये ऐसी हकीकत हैं जो शंका को जन्म देती हैं, खासकर जब चुनाव ७०+ से ज्यादा की दर से मतदान हुआ हो जहाँ लोग नये इंक्रलाब के लिये घरों से निकल रहे थे और लोकतंत्र प्रणाली के तहत उम्मीद बदलाव की थी, लेकिन परिणाम इसके विपरीत, कही ना आजाद चुनाव के माहौल को भी भ्रमित करता हैं वही भारत के लोकतंत्र पर भी सवाल खड़ा करता हैं. अगर हम, हकीकत में इस मसले पर गंभीर हैं तो चुनाव की पारदर्शिता को और इमानदारी से तलाशना होगा, जहाँ मतदाता बिना किसी भ्रम, सवाल या शंका के अपने मत के अधिकार को देश और लोकतंत्र के हित में इस्तेमाल कर सके.

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