चलो रे चलो, अवार्ड लौटाने का समय फिर आ गया

Posted by Gaurav Pandey
March 29, 2017

Self-Published

साहित्यकार बिरादरी कहां है? सारे अवार्ड लौटा दिए थे क्या? अरे भाई साहित्य जगत के कालजयी रचनाकार शेक्सपियर की कालजयी रचना के मुख्य चरित्र को योगी बदनाम कर रहा है। मुख्यमंत्री हो गए तो क्या कुछ भी करेंगे? तानाशाही हो गयी ये तो। आप लोगों के प्रोटेस्ट के इंतेजार में हूं। घर की अलमारी, ताख वगैरह में देखो कोई न कोई अवार्ड पड़ा ही होगा, फेंक के मुँह पे मारो सरकार के। मंटो की कसम… मंटो की नहीं, मंटो आपकी नज़रों में साहित्यकार कहाँ था… शेक्सपियर की ही ले लो… तो शेक्सपियर की कसम योगी और मोदी को साहित्य के साथ छेड़छाड़ नहीं करने देंगे। उठो साहित्यकारों, अवार्ड ढूंढ़ो और चिपका दो सरकार के चेहरे पर।
लेकर रहना आज़ादी, तानाशाही से आज़ादी, साहित्य विरोधियों से आज़ादी।

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