पुलिस वाले की डायरी के अंश

Posted by Sunil Jain Rahi
March 27, 2017

Self-Published

डायरी लिखना बड़ा जोखिम का काम है। जोखिम हर कोई नहीं उठा सकता। परिवार जोखिम कम से नहीं है। उसे भी हर कोई नहीं उठा पाता। आधे से ज्‍यादा लोग इसी भय से कुंआरे रह जाते हैं। देश का जोखिम/राज्‍य का जोखिम तो उठाने का साहस कर सकता है, लेकिन परिवार का जोखिम गैर-समझदार लोग  ही उठाते हैं। जो परिवार चला सकता है, जरूरी नहीं कि देश चला पाए। देश चला सकता है, जरूरी नहीं कि वह परिवार चला पाए।

पुलिस में लोग जोखिम उठाने के लिए भर्ती होते हैं। जिनमें हिम्‍मत होती है, पुलिस में भर्ती हो जाते हैं। जब जोखिम उठाने की आदत पड़ जाती है तो शादी कर लेते हैं। पुलिसवाले मिर्च की तरह होते है। मिर्च का असर एक समान होता है। उसका स्‍थान परिवर्तन से अर्थ परिवर्तन नहीं होता। पुलिस हरियाणे या मुंबई या फिर दिल्‍ली की। सभी हफ्ता में विश्‍वास करते हैं। सभी थर्ड डिग्री का इस्‍तेमाल करते हैं। हर राज्‍य की पुलिस की वर्दी अलग होती है। वर्दी अलग होने से नम्रता नहीं आ जाती। वर्दी पहनते ही भाषा कड़क मसालेदार चाय की तरह कड़क और कड़वी हो जाती है। वर्दी के साथ डंडा भी होता है। डंडा सत्‍ता का प्रतीक होता है। सत्‍ता प्राप्‍त होने पर मुर्दा भी सतर हो जाता है।

पुलिसवाला साहित्‍य का विद्यार्थी होता है। साहित्‍य का विद्यार्थी लिखने का शौकीन होता है। पुलिसवाले को भी लिखने का शौक होता है। साहित्‍य का विद्यार्थी डायरी लखिता है। पुलिस वाला रिपोर्ट लखिता है। पुलिस वाला भी डायरी लिखता है। उसे रोजनामचा कहते हैं।

डायरी पुलिस की भाषा में होती है। सुबह की चाय रिक्‍शे वाले की थी। नाश्‍ता ऑटो वाले ने करवा दिया। बाइक वाला आया था, छोले भटूरे खिला गया। नकद किसी ने नहीं दिया। नकद लेने में डर लगता है। पता नहीं कहां कैमरा फिट हो। साले के पास पोलूशन नहीं था, चुपचाप 200 रुपये जेब में ठूंस गया। मैंने हाथ नहीं लगाया। कैमरा लगा होगा तो कह देंगे। हम कुछ नहीं किए साहब। बी एम डब्‍ल्‍यू को रोकने का मन था, साहब ने मना कर रखा है। ट्रक वाला और बाइक वाले हमारे असली शिकार हैं। कोई रिस्‍क नहीं है। आज बाइक पर लड़की और ट्रक पर ओवरलोड सामान मिला। हफ्ते का हफ्ता पूरा हो गया।

साहब से डर लगता है। उनकी डांट से डर नहीं लगता। उनकी बीबी से डर लगता है। कब साहब के घर डयूटी लग जाए। डर लगता है लाईन हाजिर होने से। डर तो अपनी बीबी से भी लगता है। उसको हफ्ता भी देना पड़ता है और डाट भी खानी पड़ती है। बच्‍चे उसके हैं या मेरे। उनकी जिम्‍मेदारी मेरी है। वे पढ़े तो ठीक नहीं तो तुम्‍हारी नौकरी ही बेकार है। पुलिस में होने का का क्‍या फायदा एक लौकी उठा कर नहीं ला सकते। आज प्‍याज खतम है। किराने वाले ने सामान नहीं भेजा है। बच्‍चों की फीस भरनी है। मां बीमार है उसे अस्‍पताल ले जाना है। बापू की तेरहवीं आने वाली है। पैसों का इंतजाम करना है। गांव के मकान की दीवार गिर गई है, उसे ठीक कराना है। साहब को हिस्‍सा भिजवाना है।

वर्दी के अलावा दो ही शर्ट हैं। मकान किराये पर कोई नहीं देता है। कहते हैं पुलिस वाला है। सब मुझसे डरते हैं। पीठ पीछे सब गाली देते हैं। कुछ दिन ट्रेफिक में लग जाऊं तो बच्‍चों का एडमिशन इंगलिश मीडियम में करवा पाऊं। हिन्‍दी में पढ़कर हमे कौनसा बी एम डब्‍ल्‍यू कार रोकने का अधिकार मिल गया।

डायरी लिखने का मन करता है। लिखना चाहता हूं-आज मेरा दारू पीने का मन। मेरा भी मन कर करता है कोई मुझसे प्‍यार करे। कॉलेज के सामने ड्यूटी करने का मन करता है। होली पर रंग खेलने, दिवाली मनाने, ईद पर सबके साथ नमाज पढ़ने, गणेश चतुर्थी पर गुलाल उड़ाने, भाभी को रंगने, पड़ोसन से आंखे लड़ाने का मेरा भी मन करता है।

मैं भी मन की बात करना चाहता हूं। वटसएप पर दिखना चाहता हूं। फेसबुक पर शर्मिला के नाम से फ्रेंड बनना चाहता हूं। लेकिन पुलिस वाला हूं। वर्दी में हूं। कानून का रखवाला हूं। कानून तोड़ नहीं सकता, जो तोड़ते हैं उन्‍हें रोक नहीं सकता। मेरा भी घर है, मां है, बाप हैं लेकिन मैं पुलिस वाला हूं, इसलिए मेरा कोई नहीं है।

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