बेनाम वर्ग

Posted by Mukesh Kumar Joshi
March 23, 2017

Self-Published

आज हर तरफ नेता, पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता अपनी छवि चमकाने के लिए दलित, महिला, अल्पसंख्यक या किसानों की बात करते हैं या उनके हक के लिए यदा कदा आवाज उठाते रहते हैं । कुछ सच्चे भी है पर अधिकतर इसका उपयोग प्रसिद्धि के लिए ही करते हैं । क्यूँकि ये चार सर्वाधिक आजमाए हुए सफल, लोकप्रिय एवं आसान मुद्दे हैं ।

इस विषय पर मेरा सिर्फ इतना ही ध्यान दिलाने का प्रयास है कि एक बहुत बड़ा वर्ग ऐसा भी है जो ना तो दलित है ना महिला है ना अल्पसंख्यक है और ना ही किसान है , मगर परेशान है । उनके हक और हितों लिए आवाज उठाने वाला भी कोई नहीं है । क्यूँकि इस वर्ग की ना तो कोई पहचान है और ना ही कोई नाम दिया गया है । यह असंगठित वर्ग तादात में खूब है पर किसी का वोट बैंक नहीं । हर बार हताश होता है मगर कुछ अच्छे की उम्मीद में फिर वोट देता है ।

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