मंदिर नहीं मस्जिद नहीं हमें चाहिए भाईचारा।

Posted by Abdur Rahman
March 27, 2017

Self-Published

भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और यह देश अपनी संस्कृति, धर्मनिरपेक्षता और विभिन्नताओं में एकता के लिए पूरे विश्व में जाना जाता है। लेकिन आज कुछ असामाजिक तत्व हमारे देश को बदनाम करने पर तुले हुए हैं। वो नहीं चाहते हम एक दूसरे से मिलजुल कर रहें, वो नहीं चाहते हम एक दूसरे के पर्व त्योहारों में मिल कर खुशियां मनाएं। वो नहीं चाहते कि कोई हिन्दू अपने मुस्लिम दोस्त को होली के त्योहार में रंग लगाए, वो नहीं चाहते कोई मुस्लिम अपने हिन्दू दोस्त को ईद की सेवैया खिलाए। वो सिर्फ और सिर्फ दंगे चाहते हैं।

आज हमारा देश बहुत ही कठिन परिस्थितियों से गुज़र रहा है, लोग विकास की बातें छोड़ कर विनाश की बातें करने लगे हैं। जहाँ देखो हिन्दू-मुसलमान, मंदिर-मस्जिद की बातें हो रही हैं। लोगों को अपने रोज़गार से बढ़कर मंदिरों और मस्जिदों की फिक्र हो रही है, ज़रूरी मुद्दों को भूलकर मंदिर-मस्जिदों की बातें हो रही हैं, जो आने वाले समय में देश और हम सभी के लिए घातक हो सकता है।

जिस राम मंदिर और बाबरी मस्जिद के लिए लोग एक दूसरे का खून करने के लिए उतारू हैं, वही लोग अपने आस-पास के मंदिर या मस्जिद में कितना जाते हैं, पता नहीं।
मैं अपने ही शहर का उदाहरण देना चाहता हूं, मैं बिहार के कटिहार का रहने वाला हूं और मेरे मोहल्ले दुर्गापुर में 2 मस्जिदें हैं। एक मस्जिद में लगभग 500 लोगो की नमाज अदा करने की जगह है तोह दूसरी मस्जिद में लगभग 150 लोगो की नमाज अदा करने की जगह है,परंतु आप लोगों को जान कर हैरानी होगी की जब नमाज का वक़्त होता है तोह दोनों मस्जिदे मिलाकर 50 लोग ही नमाज अदा करने आते है, और ठीक वैसा ही हाल हमारे मोहल्ले से कुछ दूर पर स्थित 2 मंदिरो का है एक मंदिर यज्ञशाला के प्रांगण में स्थित है और दूसरा शिव मंदिर चौक पर,परन्तु जब शाम को आरती का वक़्त होता है तोह लोगो की बहुत कम उपस्थिति होती है जबकि वो हिन्दू बाहुल्य इलाका है और वहाँ के ज्यादातर दुकानदार हिन्दू ही है परंतु आरती के वक़्त बहुत कम लोग आते है।

मेरे कहने का मतलब ये है कि जो लोग अपने आस पास के मस्जिदों में नमाज अदा करने और मंदिरो में पूजा नहीं करने जाते वो लोग अयोध्या किस मुह से जायेंगे बाबरी मस्जिद में नमाज अदा करने और राम मंदिर में पूजा करने?? तोह फिर आपस में मार काट दंगा करने का क्या मतलब वो भी एक विवादित मस्जिद और मंदिर के लिए।

हमारा बचपन ही अच्छा था जब हम सभी एक ही टिफिन में खाया करते थे बिना किसी भेद भाव के,बिना किसी संकोच के की ये टिफिन हिन्दू का है या मुस्लमान का, हमें तोह हमारी भूख से लड़ाई जितनी थी,और हम वो लड़ाई हमेशा जीत जाते थे क्योंकि की हमारे पास हमारे दोस्तों का साथ हुआ करता था जो बिना भेद भाव के अपना टिफिन हमें दे देते थे।

दोस्तों अंग्रेजो ने भी हमें बाटने की भरपूर कोशिस की पर हम नहीं बटे।और आज भी कुछ लोग है जो हमें बाटने की कोशिस में लगे है,दोस्तों अब वक़्त आ गया है उन सभी साम्प्रदायिक लोगो को जवाब देने की, जो हमें बाटना चाहते है। और उनको जवाब देना सबसे आसान है #एकता बनाये रखे। #हम_एक_है_तोह_देश_एक_हे।

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