महिला दिवस पर मात्र महिलाओ को ही नहीं , सभी पुरुषो को भी बधाई |

Posted by Pranav Dwivedi
March 8, 2017

Self-Published

महिला दिवस पर मात्र महिलाओ को ही नहीं , सभी पुरुषो को भी बधाई |
मेरी राय में, स्त्रीत्व का विचार वास्तव में लिंग के बारे में नहीं है बल्कि एक गुण है जो किसी भी व्यक्ति में स्त्रीत्व पक्ष का उदाहरण है। स्त्री गुण जहाँ मातृत्व, अपनत्व, मानसिक ताकत, कोमलता, दयालु, सुंदर इत्यादि को दर्शाता है वहीँ पुरुष गुण शारीरिक शक्ति, आक्रामकता आदि । सभी प्राणियों में स्त्री और पुरुष दोनों के कुछ गुण हैं।
मनुष्यों में शारीरिक तथा मानसिक स्थिति, आयु आदि के आधार पर, समय-समय कुछ विशेष लक्षण अधिक सक्रिय हो जाते है । वृद्ध और परिपक्व लोग अधिक दयालु और धैर्यवान हैं और इसलिए उनमे अधिक स्त्रीत्व है हैं। हो सकता है आज आपके दादाजी बहुत धीमे , धैर्यवान प्रतीत हो लेकिन अपने पिता से पूछने पर आप पाएंगे की एक समय में वो भी आक्रामक और धैर्यहीन रहे होंगे ।
मानुष के गुण अलग अलग स्थितियों और उम्र के आधार पर अलग-अलग होते हैं। लेकिन यह हमारे समाज की अवधारणा ही है जो हजारों सालों से मनुष्य उसके भीतर स्त्री के गुणों को स्वीकार करने के वजाय इनके लिए शर्मिंदा है।
जब कोई व्यक्ति भावुक हो जाता है या आँसू डालता है, तो समाज जल्दी से उसे झुकाता है और कहता है “एक लड़की की तरह व्यवहार न करें”
जब एक लड़की अपनी आवाज उठाती है, तो समाज उसे कहता है कि वह किसी आदमी की तरह चिल्लाना न करे।
जब कोई व्यक्ति कहता है कि वह युद्ध के लिए जाने के बजाय एक उद्यान विकसित करना पसंद करते हैं, तो समाज कहता है “जाओ और एक आदमी की तरह लड़ो”।
जब एक महिला कहती है कि वह एक सैनिक बनना चाहती है, तो समाज कहता है “जाओ और एक अच्छी महिला की तरह बगीचे का ख्याल रखना”।
आखिर इन नियमो के साथ बराबरी कैसे मिलेगी ? हम कैसे तय कर सकते हैं कि एक पुरुष को दया कभी नहीं दिखाना चाहिए? किसने फैसला किया कि महिलाओं को कभी आक्रामक नहीं होना चाहिए? और सबसे महत्वपूर्ण बात, किसने फैसला किया कि पुरुष होना ही श्रेष्ठ है ?
जहां हम स्त्री के गुणों को पसंद करते हैं और चूंकि महिलाएं स्त्रीत्वपूर्ण हैं, हम स्त्री के गुणों की सराहना करते हैं, और साथ ही हम मानते हैं कि महिलाओं को उनके पुरुषत्व के के गुणों को प्रदर्शित करने का अधिकार होना | महिला दिवस पर जोर इस बात पर दिया जाना चाहिए की विश्व भर में “स्त्रीत्व” गुण महत्वपूर्ण है और महिलायें दासी नही है, शाषक है |
महिला दिवस का यह मतलब यह नहीं होना चाहिए कि सभी महिलाओं को पुरुषों की तरह व्यवहार करना चाहिए या पुरुषों की तरह उनकी समानता साबित करनी चाहिए। इसका मतलब यह नहीं है कि महिलाओं को फूलों को त्यागना चाहिए और बंदूकें पकड़नी चाहिए ताकि यह सिद्ध हो सके कि वे पुरुषों के बराबर हैं। ऐसा नहीं है कि समानता क्या है सच्ची समानता तब होती है जब हम सभी स्त्री-पक्ष को स्वीकार करते हैं और महिला के लिए अपनी स्त्रीत्व की सराहना करते हैं। और हमें इस पूरे वर्ष पूरे करने के लिए प्रयास करना चाहिए और केवल एक दिन ही नहीं।
स्त्री लक्षण गुणों के लिए माध्यमिक नहीं हैं। इसलिए, यह स्वचालित रूप से सूचित करता है कि पुरुषों को भी इन महिलाओं के पहलुओं को ध्यान में रखना चाहिए और उन्हें स्वीकार करना चाहिए कि कोई व्यक्ति युद्ध के लिए जाने के बजाय पौधों को बढ़ाना चुनता है, या यदि वह आक्रामकता पर कोमलता पसंद करता है तो यह कुछ भी गलत नहीं है।


संक्षेप में, महिला एक लिंग नहीं है, बल्कि एक विशेषता है।जिस प्रकार शिव का स्वरुप है , उसी प्रकार समाज का स्वरुप है | स्त्री और पुरुष विरोधी नहीं, पूरक है | हर स्त्री में एक पुरुष है और हर पुरुष में एक स्त्री है। यह दिन है इस बात को समझने का की यह दुनिया उतनी ही महिलायों की है जितनी पुरुषों की और हम पुरुष हमारे भीतर और हमारे चारों तरफ उनको अपने समान मानते हैं।

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