शहीद भगत सिंह और पं.जवाहरलाल नेहरु

Posted by Ajay Katare
March 24, 2017

Self-Published

शहीद भगत सिंह और पं.जवाहरलाल नेहरू
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भगत सिंह सुभाष चन्द्र बोस के उलट नेहरू से अधिक प्रभावित जान पड़ते हैं।
वे कहते हैं कि सुभाष परिवर्तनकारी हैं जबकि नेहरू युगांतरकारी।
भगत सिंह का मानना था, “एक के विचार में हमारी पुरानी चीज़ें बहुत अच्छी हैं और दूसरे के विचार में उनके विरुद्ध विद्रोह कर दिया जाना चाहिए।एक ‘भावुक’ कहा जाएगा और दूसरा ‘युगांतरकारी और विद्रोही।”
21 साल के क्रांतिकारी भगत सिंह की यह टिप्पणी और भी मानीखेज है, “सुभाष बाबू राष्ट्रीय राजनीति की ओर उतने समय तक ही ध्यान देना आवश्यक समझते हैं जितने समय तक दुनिया की राजनीति में हिन्दुस्तान की रक्षा और विकास का सवाल है। लेकिन पंडित नेहरू राष्ट्रीयता के संकीर्ण दायरों से निकलकर खुले मैदान में आ गए हैं।”

विचारों का भटकाव सुभाष और नेहरू में किसका चुनाव किया जाए❓

भगत सिंह अपना निर्णय सुनाते हैं, “सुभाष आज शायद दिल को कुछ भोजन देने के अलावा कोई दूसरी मानसिक खुराक नहीं दे रहे हैं….इस समय पंजाब को मानसिक भोजन की सख्त ज़रूरत है और यह पंडित जवाहरलाल नेहरू से ही मिल सकता है।”
भगत सिंह उनके अंधे पैरोकार बन जाने के ख़िलाफ़ हैं।लेकिन जहाँ तक विचारों का संबंध है, वहां वे उनके साथ लग जाने की सलाह देते हैं ताकि नौजवान इंकलाब के वास्तविक अर्थ, हिन्दुस्तान के इंकलाब की आवश्यकता, दुनिया में इंकलाब के स्थान, आदि के बारे में जान सकें।
नेहरू इसमें नौजवानों की मदद करेंगे कि वे “सोच-विचार कर अपने विचारों को स्थिर करें ताकि निराशा, मायूसी और पराजय के समय में भी भटकाव के शिकार न हों और अकेले खड़े होकर दुनिया से मुकाबले में डटे रह सकें।”
🙏 अजय कटारे
Date Written: July 1928
Author: Bhagat Singh
Title: Different views of new leaders (Naye netaon ke alag alag vicar)
First Published: in Kirti July 1928.

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