संवैधानिक अधिकार

Posted by Rumalsingh Dinkar
March 11, 2017

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जहां सिंहासन की लड़ाई को धर्म युध्द कह कर सम्मानित वरिष्ठ अग्रजों को मौत के घाट उतार दिया जाये और उस घिनौने कृत्य को धर्म की संज्ञा दी जाये तो हम अपनी इस पौराणिक सभ्यता का सही आंकलन  करने में क्यूं असमर्थ है। इस देश मै विचारों की अभिव्यक्ति के संवैधानिक अधिकार को क्यूं हिंसा का सहारा लेकर राष्ट्र प्रेम के नाम पर दबाया जा रहा है। सभ्यता पुरानी और शाश्वत है तो क्यूं डरते हैं इस सभ्यता के पुजारी। क्या इस लिये कि युवाओं ने सही दिशा में सोचना शुरू कर दिया है। क्या इस लिये कि इनका खोखलापन युवावर्ग जान चुका है और इनका सदियों के वरचश्व को खतरा पैदा हो गया है।

 

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