समाज में एंटी रोमयो क्यों

Posted by Baranwal Nitishraj
March 26, 2017

Self-Published

इश्क पे किसी का जोर चला है, साहेब! और न चलेगा. इश्क तो हो जाता. नैन लड़ी और इश्क हो गया. आखिर ये बात योगी जी को कौन समझाए. इश्क,प्रेम, मुहब्बत की  बंधन से  साक्षात् भगवन श्री कृष्ण, प्रभु श्री राम, आदम-हौआ, दुष्‍यंत-शकुंतला, विश्‍वामित्र-मेनका न बच पाए तो भला हम मनुष्य कैसे बच पाएँगे. ये इश्क,प्रेम, मुहब्बत आदिकाल से चलता आ रहा है. पर शुरू से प्यार और समाज के बीच परस्पर सामंजस्य नही रहा है. सदियों से प्यार और समाज के बीच जंग चलता आ रहा है और प्यार करनेवाले तमाम  जंग को जीत कर इतिहास अपना नाम दर्ज करवा गये. आखिर प्यार पे पाबंद क्यू ? प्यार ही तो की है किसी कत्ल तो नही की है. एक और कहा जाता है की हमारा देश नौजवानों का देश. लगभग आधी से ज्यदा लोग 18 से 35 वर्ष के लोग है. और युवा अगर प्यार न करे तो और क्या करें.

बालों पर खिजाब पुताए जर्नलिस्‍ट सरोज पांडेय कहते हैं. यार लोग तो इश्‍क के हिस्‍से के इतवार चाहते थे. इन्‍होंने तो आधी आबादी की सुरक्षा के नाम पर दिल ही आधा कर दिया.

प्रोफेसर काशीनाथ सिंह काफी मंथन के बाद कहते हैं…’मैं शुरू से ही कहता रहा हूं कि समाज में बुराइयां अशिक्षित लोगों से नहीं, बल्कि प्रबुद्ध लोगों के चुप रहने से उपजती हैं. एंटी रोमियो दल का पुरजोर विरोध होना चाहिए. प्रबुद्ध लोगों का प्रतिनिधिमंडल बनाकर योगीजी से मिलना चाहिए. उन्‍हें बताना चाहिए कि प्‍यार मौलिक और नैसर्गिक है. दिल की बदत्‍तमीजी को दंड संहिता के दायरे में लाना ठीक नहीं.

कल्‍याण सिंह से लेकर येदियुरप्‍पा तक सभी ने इस पर सख्‍ती को नकारा है. इससे ‘सबका साथ, सबका विकास’ के नारे को बल मिलता है. मेक इन इंडिया की तरह लोग चंगा रहते हैं. डिजिटल इंडिया की तरह नजरें जवान रहती हैं. तभी तो किसी शायर ने कहा है कि

‘हमेशा नजरें मिलाता हूं मैं हसीनों से

इसलिए नहीं लगती मेरी निगाह को जंग…’

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