‘सियासत चाहती है हम मोहब्बत न करें’

Posted by sankalp thakur
March 29, 2017

Self-Published

‘सियासत चाहती है हम मोहब्बत न करें’

स्त्री, शूद्र, कुत्ता और कौवा में झूठ ,पाप और अंधकार रहता है ऐसा कहने वाले कौन लोग हैं? स्त्री यौन सुख, पुत्र पैदा करने और दासकर्म के लिए संज्ञाशून्य मशीन में बदल जाए और पूरी तरह से पति की दास्ता स्वीकार कर ले ये बात किसने कही है। नारी और शूद्र को ढोल, गंवार, पशु की तरह ताड़न के अधिकारी होते हैं यह बात किस किताब में है। पति चाहे लुच्चा, कामी, अशिक्षित, गुणहींन हो तो भी पत्नी को चाहिए वह उसकी एक देवता की तरह उपासना करे ये बात कहां लिखी है।

लड़किया सड़क से ज्यादा अपने घर में असुरक्षित है क्या वहां के लिए सरकार के पास कोई ANTI ROMEO SQUAD है। 17-18 साल की उम्र में जब कोई लड़की घर से बाहर पढ़ाई के लिए कॉलेज निकलती है और पहली बार उसकी दिल किसी नौजवान को देखकर धड़कता है तो वह क्यों नहीं उसके साथ किसी पार्क में जाए, वह क्यों नहीं हाथ में हाथ में डालकर घुमें, वह क्यों नहीं अपने महबूब को आलिंगन करे।

महिला सुरक्षा प्रदान करना किसी भी सरकार के लिए महत्वपुर्ण काम है लेकिन व्यक्तिगत जीवन में हस्तक्षेप का अधिकार किसी सरकार को नहीं। हर युग के मुमताज का अधिकार है कि शाहजहां को नजर भर कर देखें। हर शाहजहां का हक है कि अपने महबूब के साथ कॉर्नर वाली सीट पर बैठकर फिल्म देखें।
सिनेमा घर से निकलकर सड़क पर एक ही आइसक्रीम में दोनों खाएं।

शाहजहां और रोमियो को किसी से डरने की जरूरत नहीं। वह क्यो अपना पहचानपत्र या आधारकार्ड लेकर मोहब्बत करने निकले। रोमियो तुम डरो मत,पार्क से लेकर बस स्टेंड तक जूलियट का इंतजार करो। सरकार को रोमियो और छिछोड़ो में फर्क करना नहीं आता। मैं भी तुम्हारी तरह रोमियो हूं, शाहजहां हूं..मैं भी मोहब्बत करता हूं। तुम भी करो और दूसरों को भी करने की नसीहत दो..सियासत चाहती है हम मोहब्बत न करें। सियासत को कामयाब होने नहीं देना।

अगली बार मैं तुमसे मिलुंगा। दिलकोष गार्डन में या फिर राम मनोहन लोहिया पार्क में अपनी मुमताज के साथ तुम भी आना अपनी जुलियट के साथ। मुझे मालूम है तुम मुझे पहचान लोगे क्योंकि हमारा रंग एक है मोहब्बत का…लृवादा करो पहचानने के बाद भी तुम मेरे प्रेम के आनंद में खलल नहीं डालोगे। खलल डालने का काम ANTI ROMEO SQUAD वालों पर छोड़ते हैं।

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