सोशल मीडिया से हो समाज का कल्याण।

Posted by Garima Bhatt
March 10, 2017

Self-Published

फेसबुक मे विभिन्न विषयों पर विविध आयामों के साथ पैना लेखन हो रहा है , सामाजिक मीडिया के इस माध्यम पर सांस्कृतिक, समसामयीक और साहित्यिक विषयों पर लेखन अन्य विषयों की अपेक्षा ज्यादा है साथ ही साथ ज्ञानवर्धक सामाजिक एवं राजनीतिक विमर्श भी हो रहा है । लेकिन इन प्लेटफार्म पर लोगों की बेवकूफियाँ भी कम देखने को नहीं मिलती है । कुछ लोग फेसबुक को लोकप्रियता के पैमाने के रूप मे देखते है. इन लोगों का एक मात्र उद्देश्य अपनी फोटो अपलोड करना और उस पर आने वाले लाइक्स और कमेंट्स से दूसरो के साथ प्रतिस्पर्धा करना होता है ।
वही दूसरी ओर लेखन के कार्य से जुड़े लोग एक पंक्ति के लेखन को लेखन के विकास की धुरी मानने के मुगालते मे है और या तो अपने आपको प्रखर बुद्धिजीवियों की फेहरिस्त का हिस्सा मानते है या फिर खुद उनमे शामिल करने का भरसक प्रयास करते है। , संभवतः यह भी समय की अनुपलब्धता का बहाना बनाए , लेकिन दिन मे कम से कम 20 मिनट इन्हे आनलाइन देखा जा सकता है ।कुछ दिनों से लोगों का फेसबुक से मोह भंग होता जा रहा है वह अब इंस्टाग्राम , व्हाट्स अप और स्नैपचैट का रुख कर रहे है उनके अनुसार अब एफबी पर टाइम पास नहीं होता ।
यह बात हमें स्पष्ट तौर पर जान लेनी चाहिए कि एक सीमा तक ही यह माध्यम टाइम पास का साधन हो सकता है ,इसके बाद यह क्रांति बन जाता है । इसने हमें असीम शक्ति दी है जिससे हर व्यक्ति पत्रकार बन गया है अब यह हमारे उपर है कि हम इसका स्तेमाल कल्याण मे करते है या अपनी झूठी प्रसिद्धि पाने के लिए अपने निजी जीवन को सार्वजनिक करते है और अपने टाइम पास का जरिया बनाते है । अंततः फेसबुक एक विचार है और विचार मरा नहीं करते ।

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