Pप्यार पर पहरा

Posted by Akash singh
March 31, 2017

Self-Published

हम प्यार से इतना क्यों घबराने लगे प्यार तो दिल के गहरे समंदर में डूब कर किया जाता है ,प्यार की कोई सीमा तो नही हो सकती

ना ही प्यार में कोई निगरानी ही ,कोई बंदिशे कब भला प्यार को जंजीरों में कैद कर पाए है ,प्रेम तो त्याग का नाम है आप जिससे भी प्यार करते है वो ही आपकी नज़र में आपका सबकुछ है ,प्रेम में दो देह की सांसो की माला एक ही डोर में गुथी होती है आप अगर उस डोरी को तोड़ने की गुस्ताखी करेंगे तो मलारूपी साँस के साथ देह भी डोरी से छूट जरूर सकते है लेकिन एक दूसरे के बिना रह नही सकते !

आप हमेशा समाज ,संस्कृति के झूठे लबादे में प्यार पर बंदिशे लगाते है लेकिन जरा यह भी तो बतलाइए की उस समाज और संस्कृति के बने रहने और होने का आधार क्या है वह यही है जिसे आप  ‘प्रेम’ कहते है ,आप अपने ही संस्कृति और इतिहास के पन्नो को पलटो तो  प्रेम की अनगिनत कहानियाँ आपकी इस मानसिक जड़ता को दूर कर देंगी ,आप अपने इतिहास के शुरुआती पन्नो को पलटोगे तो आपको दुष्यंत और शंकुतला की कहानी मिलेगी ,राम और सीता प्रेम और त्याग की प्रतिमूर्ति ही तो है ,कृष्णा और राधा का प्रेम   और न जाने कितनी ही कहानियाँ ,प्यार ने हमेशा समाज को बदला है समाज प्यार को बदल दे यह असंभव है !

लेकिन हाँ एक जरूरी रेखा जरूर खीचना चाहुंगा  प्रेम और छद्म प्रेम के बीच ,मै उस हालत  में निगरानी की वकालत जरूर करता हु जब प्यार में सिर्फ स्वार्थ हो और प्यार ओछेपन का शिकार  हो नैतिकता को शर्मसार  और प्रेमी के प्रेम को बस देह की सुकून देने वाला समझा जाता हो ,घर से बहार निकलते ही जिस तरीके से अश्लीलता का सामना करना पड़ता है लड़कियों को ये कोई साधारण सवाल नही है ,हमे समझना होगा की प्रेम में एक दुसरे की मर्ज़ी का होना बहुत जरूरी  है ,प्रेम तो दो आत्मा का मिलन  है  ,कमेंट से लेकर छेड़खानी तक इसपर निगरानी जरूरी है लेकिन ये निगरानी हर व्यक्ति की नैतिक जिम्मेदारी है न की किसी एक संस्था की !

संस्कृति की आड़ में प्रेम के अपने गौरवमयी इतिहास को धूमिल मत कीजिये बल्कि समाज में प्रेम के वास्तविक पाठ को समझिए बताइए ,इसकी महत्ता लोगो को समझना बहुत जरूरी है ,प्रेम के सच्चे अर्थ को अगर हम समझ पाए तब ही हम प्रेम के इस ओछेपन से भी लड़ पाएंगे और प्यार के नाम पर हो रही इस अश्लीलता से भी, अगर डंडों  के जोर पर आप उन्हें प्रेम की मर्यादा सिखाने का प्रयास करेंगे तो माफ़ कीजियेगा लेकिन न यह हो सका है और न ही हो सकेगा !!

आकाश सिंह

दिल्ली विश्विद्यालय

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