पटना में सुबह दौड़ने के लिए भी अब लगते हैं पैसे

Posted by Prashant Jha in Hindi, Society
March 17, 2017

कभी पटना आइये तो किसी से पूछिएगा कि इश्क करने के लिए और सेहत बनाने के लिए सबसे अच्छी जगह कौन सी है? जवाब एक ही मिलेगा संजय गांधी जैविक उधान यानी कि पटना का Zoo (चिड़ियांघर)। इश्क पर तो खैर हर ज़माने में पहरा रहा है और इश्क में तो इंसान भी खर्च हो जाता है समर्पण जो है। लेकिन अभी बहुत दिन नहीं हुए हैं जब सेहत बनाना या दौड़ना मेरे शहर में मुफ्त हुआ करता था। लेकिन अब वहां खर्च अपने पसीने बहाने पर भी होने लगा है।

हुआ ये है कि पहले पटना Zoo में मॉर्निंग वॉक करने, कसरत करने या वहां बने झील के किनारे दौड़ने के लिए आपको कोई पैसा नहीं देना होता था, लेकिन अब 30 रुपये खर्च करने होते हैं।

CM सर पूरे शहर का एक मूड होता है या बनाया भी जाता है। किसी शहर से अगर ज़्यादा खिलाड़ी निकलते हैं तो उस शहर के मूड या यूँ कहें कि वहां के कल्चर का बहुत ज़्यादा रोल होता है। और उसी तरह फिर आमलोग भी फिटनेस की तरफ ज़ोर लगाते हैं। इस मूड और कल्चर का लॉन्ग टर्म में फायदा ये होता है कि पूरे शहर का स्वास्थ्य ठीक ठाक हो जाता है।

हरियाणा देखिये या दिल्ली का जिम कल्चर देखिये। पटना में हूँ, सुबह सुबह दौड़ने के लिए zoo(botanical garden) से बेहतर शायद ही कोई जगह है यहाँ। और सुबह सुबह ही गज़ब की भीड़ भी होती थी लड़के-लड़कियों की दौड़ने/कसरत करने या टहलने के लिए। बचपन से देखा है। और ये बिलकुल ही फ्री होता था। इस बार आया तो पता चला की अब सुबह-सुबह भी एंट्री का पैसा लगता है। वो भी 30 रूपया। टिकट लेके अंदर गया और परिणाम वही था जिसका डर था। इस जनरेशन के लोग लगभग गायब थे। हर सुबह 30 रुपये खर्च करके शायद ही कोई स्टूडेंट जाएगा टहलने या दौड़ने। ज़्यादातर ऐसे लोग जो रिटायर हो चुके हैं या बढ़िया आर्थिक स्थिति में हैं। ये बात सही है कि पहले से अब सुंदर दिखने लगा है zoo लेकिन इस शर्त पे की लोगों की फिटनेस के प्रति जागरूकता को मार दिया जाए ये कहीं से भी सही नहीं लगता है।

क्यों नहीं कोई दमदार खिलाड़ी निकल पा रहा है इस राज्य से? कैसे निकलेगा CM सर, पूरा शहर के सपोर्ट(इंफ्रास्ट्रक्चर, माहौल,लोगों की समझ खेल के प्रति) से बनता है एक खिलाड़ी, और हमलोग तो यहाँ फिटनेस की मानसिकता को ही मार रहे हैं। एक ढंग का स्टेडियम नहीं है। टेनिस खेलने के लिए एयरपोर्ट के बगल में जो कोर्ट बना है उसमें घुसने के लिए अफरात पैसा चाहिए। नया जनरेशन से दौड़ने के लिए पैसा लीजियेगा तो फिर उम्मीद यही करिये की तमाम अस्पतालों में आपके राज्य के लोग लाइन में मिलेंगे। अब धोनी का उदाहरण मत दीजियेगा। सदियों में एक निकलता है धोनी लेकिन माहौल सरकार और लोग ही मिल के बनाते हैं। CM साहब ये तय है कि शराबबंदी के बाद रेवेन्यू जनरेशन के लिए उपाय ढूंढने थे, लेकिन उसकी ये कीमत मत चुकवाइये शहर से।

एक और पार्क बनावाया गया है जिसे इको पार्क कहते हैं। यूं तो यहां अखबारों में भी खबर है कि वहां जल्द ही जिम शुरु होने वाला है, मैं भी गया देखने। मशीन तो सारे लगे हुए हैं लेकिन शुरु कब किया जाएगा इसकी ठीक जानकारी शायद ही कोई दे पाए। और हां अगर पार्क पहुंचते पहुंचते कहीं 8 बज गए तो अगले दिन आने कि तैयारी करिए। क्योंकि ये नियम है कि बस 8 बजे तक ही आप मॉर्निंग वॉक या रनिंग के लिए आ सकते हैं। फिर कुछ वक्त के लिए ब्रेक लिया जाता है। जो ओपन एयर जिम बनवाया जा रहा है उसका शुल्क होगा 200 रुपये महीना। यानी 20 रुपये दिन का।

नीतीश सर जिस वक्त में बाकी राज्य सायकल ट्रैक, मुफ्त ओपन एयर जिम जैसी सुविधाओं की बात कर रहे हैं आप दौड़ने पर भी शुल्क लगा रहे हैं। यकीन मानिए ये भविष्य के लिए खतरनाक है।

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