आँचल

Posted by Vaidehi Singh
April 15, 2017

Self-Published

कुछ वक़्त पहले मैंने एक कविता लिखी थी और उसे YouTube पर publish किया था|

वैसे तो इस विषय पर अब तब काफी कुछ लिखा जा चूका है| पर हर बार इसका दर्द हर लेखक के लेख में बराबर का पाया जाता है| क्यों? शायद इसलिए क्यूँकि हर आँचल पर हक़ सिर्फ उसे ओढ़ने वाली महिला का होता है और जब-जब उसे उतारने कि कोशिश की गयी, तब-तब एक चीख हर किसी को सुनाई दी|

ये कविता एक कोशिश है लोगों तक हर उस चीख और दर्द को पोहचने की जो कभी अकेले में तो कभी पुरे समाज के सामने निकली है| ये कविता नहीं… दर्द है हर निर्भया का|

उम्मीद करती हूँ कि यह कविता हम सब को जागरूक करे और फिर कभी कोई निर्भया दर्द से न करहाये|

इस कविता कि प्रतिलिपि (transcript) आप यहाँ पढ़ सकते हैं|

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