आखिर विद्यालय में ड्रेस क्यों हो ?

Posted by Anshul Goyal
April 14, 2017

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“भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है.” एक लोकतांत्रिक देश की शिक्षा व्यवस्था उस देश की लोकतांत्रिकता का भविष्य और लोगों

Boys and girls attend a class at the Mahatma Gandhi night school in Mumbai, Maharashtra, India.

में उसके प्रति भाव पैदा करती है. दरअसल विद्यालय ही एक ऐसा स्थान होता है जहाँ ढांचागत तरीके से बच्चों को लोकतांत्रिक शिक्षा दी जाती है. भारत जैसे देश में इस लोकतांत्रिक शिक्षा का बहुत बड़ा हिस्सा है कि बच्चे हमारी विविधताओं का सम्मान करें. इन विविधताओं में अनेक धर्म, स्थान, पहनावे आदि  आते है .

दूसरी ओर हमारी शिक्षा व्यवस्था का एक बहुत महतवपूर्ण हिस्सा है बच्चों की पौशाक . ये दोनों एक दूसरे अंतर्विरोध करते है.

जब हमारा संविधान कहता है की हम विविधता का सम्मान करें तो हम बच्चों को मजबूर क्यों करते है कि वे एक प्रकार की ही पौशाक में आए ?

स्कूल में एक पौशाक के पीछे आमतौर पर तर्क दिए जाते है कि  इससे बच्चों में एकता, समानता और अलग पहचान का भाव पैदा होता है. उनकी पहचान तो हमने उसी समय ख़तम कर दी जब हमने उन्हें एक अलग पौशाक दे दी और कहा कि अब से इसी में स्कूल आना है. (पहचान का बहुत बड़ा हिस्सा पौषक होता है ). दूसरा हम पौशाक में समानता पैदा करनी है या फिर विचार में. असल समानता तो तब आएगी न जब अलग-अलग धर्म, स्थान आदि के लोग एक दूसरे को उन्ही के खान-पान पौशाक आदि के साथ बराबर माने. तीसरा तर्क एकता का दिया जाता है हां एक पौशाक से हम एक जैसे दिखने जरूर लग जाएँगे परन्तु क्या हम मानसिक तौर एक हो जाएंगे. ये सोचने वाला विषय है ?

साथ ही एक तर्क यह भी दिया जाता है कि बच्चों की आर्थिक स्थिति स्कूल में ना दिखे जिससे उनके मन पर प्रभाव न पड़े. लेकिन अगर पौशाक है तब भी अमीर महंगे कपडे की पौशाक बना लेगा और महंगे जूते दाल लेगा. तो यह तर्क भी बेबुनियाद है.

लोकतांत्रिक समाज कि शिक्षा की जरूरत है कि बचपन से ही उनमें विविधताओं के लिए प्यार व सम्मान भरा जाए. जिसका बहुत बड़ा हिस्सा पौशाक होती है. तो हमारे स्कूल में पौशाक क्यों हो ?

 

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