आज़ाद और अपनी आज़ादी का दुखड़ा

Posted by Rana Ashish Singh
April 19, 2017

Self-Published

(आज़ाद शक्ति सेवा संगठन के संस्थापक गोविन्द ने चंद्रशेखर आज़ाद के गांव जाकर वहां की स्थितियों को जैसा देखा वैसा बयान किया. मैंने इसमें कोई एडिटिंग नहीं की है, बस जस-की-तस बात रख रहा हूँ, इस उम्मीद के साथ के साथ की सरकार इस पर कुछ करेगी)

#इतिहास_को_अपनी_गोद_में #समेटे_व_राजनैतिकता_की_वादा #खिलाफ़ी_से_गलबहिया_करता #बदरका

नर नाहर, शहीदे आजम #चंद्रशेखर आजाद का जन्म उत्तर प्रदेश के उन्नाव जनपद के #बदरका गांव में हुआ था. बदरका उस महान क्रांतिकारी क्रांति के उस महान पुरोधा की जन्मस्थली होने के कारण आज जहां पूरे विश्व में प्रसिद्ध है विदेशों से लोग आते हैं बदरका को देखने हैं लेकिन जब वह आते हैं तब सपनों से परे उनको बदरका देखने को मिलता है. उस उपेक्षित तिरस्कृत बदरका को जहां क्रांति के पुरोधा चंद्रशेखर आजाद का जन्म हुआ को आज भी दरकार है अपने ग्रामीण अंचल को विकसित होते हुए देखने की समय-समय पर राजनेताओं के द्वारा कोरे आश्वासन ही बदरका की झोली में आते रहे एहसे कोरे सपने न जाने कब पूरे होंगे इस विषय में दिन प्रतिदिन चिंचित रहने वाले बदरका को आज भी किसी शहीद प्रेमी राजनेता उसे अपने कल्याण की अपने उद्धार की जो भागीरथ सिद्ध हो बदरका के विकास में ऐसी आशा है चंद्रशेखर आजाद एक ऐसा नाम जिनके बिना आजाद भारत की कल्पना करना व्यर्थ होगा उस महान व पुण्यात्मा की जन्मस्थली की ऐसी बदहाली का जिम्मेवार आखिर कौन आखिर कौन ?

चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, अशफाक उल्ला खान, राम प्रसाद बिस्मिल, रोशन सिंह आदि क्रांतिकारी पुरोधाओं के नाम से आज युवा दिलों में नई गर्मी पैदा होती है साथ ही साथ जब ऐसे नामों का जिक्र ऐसे क्रांतिकारियों के संस्मरण युवाओं को सुनाए जाते हैं हम युवाओं का रोम रोम प्रफुल्लित हो उठता है रोंगटे खड़े हो उठते हैं साथ ही साथ यह याद आता है कि क्रांतिकारियों के सपनों के भारत का निर्माण अभी बाकी है अभी उनकी कल्पना के द्वारा देखे जा रहे भारत निर्माण की ओर हम आज भी नहीं पहुंच पा रहे हैं सांप्रदायिक व जाति भेदभाव से रहित एक शोषण विहीन समाज की रचना की लड़ाई अभी बाकी है, जब तक इस लड़ाई में लड़कर हमारी जीत नहीं हो जाती तब तक शहीदों के ऐसे संस्मरण उनकी कहानियां हमको समय-समय पर प्रेरणा देती रहेंगी.

आज भी जब पूरा विश्वास चंद्रशेखर आजाद के जन्म स्थल जिला उन्नाव के ग्राम बदरका के दर्शनार्थ आतूर दिखता है. तब आज उनके देश में उनके अपने प्रदेश में उनके अपने गृह जनपद में उनका जन्म स्थान उपेक्षित तिरस्कृत सा नजर आता है जहां कक्षा 8 के बाद किसी प्रकार की शिक्षा की व्यवस्था नहीं है ना ही स्वास्थ्य सुविधाओं को मुहैया कराने के लिए किसी भी प्रकार के सरकारी स्वास्थ्य केंद्र है न जाने यह उपेक्षा कब तक ऐसे ही चलती रहेगी सरकारों के बदलने के साथ साथ बदली राजनैतिक हवाओं के साथ साथ समय-समय पर जब शहीद चंद्रशेखर आजाद से संबंधित कार्यक्रम मनाए जाते रहे तब उन कार्यक्रमों में मौजूदा मुख्य अतिथियों विशिष्ट अतिथियों के द्वारा नए नए लोक लोक लुभावने वादे तू बदरका से किए गए पर उनमें अमल आज तक नहीं हो सका चंद्रशेखर आजाद के पूर्वज ग्राम रावत मसवान, जनपद कानपुर के रहने वाले थे आजाद जी के दादा पंडित सत्यनारायण तिवारी जी का विवाह उन्नाव जनपद में ग्राम बदरका के पंडित देवकीनंदन मिश्र की पुत्री के साथ हुआ था अति गरीबी के कारण वह अपनी ससुराल ग्राम बदरका चले गए थे और यही पर इन के इकलौते पुत्र पंडित सीताराम तिवारी व पुत्रवधू जगरानी के अंश से इस चरित्र नायक अद्वितीय योद्धा शहीद-ए-आजम चंद्रशेखर आजाद का जन्म दिनांक 7 जनवरी 1906 को हुआ आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के कारण गुजर बसर के लिए परिवार थोड़े दिनों बाद मध्यप्रदेश के अलीराजपुर नामक रियासत चला गया. बदरका का ऐतिहासिक महत्व हरबंस राय के द्वारा बनवाए गए किले जिसमें शाहजहां आकर कुछ दिन रुके उसमें शाहजहां के खजाने के छिपाए होने की बातों का जगजाहिर होने के कारण भी बढ़ जाता है इतनी सारी ऐतिहासिक धरोहरों के बाद भी आज अपनी बदहाली पर तरस खाता बदरका न जाने कब अपने आप को इतिहास की किताबों के उन पन्नों से निकालकर भविष्य के उन स्वर्णिम अक्षरों की ओर ले जा पायेगा जहां वह क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद के सपनों का देश बनाने में सहयोग कर सकें .

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