इनसे कौन वसूलेगा

Posted by Dilesh Jain
April 1, 2017

 

कुछ दिनों पहले मैंने समाचार में देखा की सहारा कम्पनी के CEO सुब्रतो रॉय को सुप्रीम कोर्ट ने जनता से लिए हुए सारे पैसे लौटाने को कहा और इस पर सुप्रीम कोर्ट काफ़ी सख़्त भी नज़र आता है,और यह जानकर ख़ुशी भी होती है की सुप्रीम कोर्ट को लोगों की चिंता है,और उसी तरीक़े से हमारी मौजूदा सरकार भी काफ़ी सख़्त है उन्होंने विजय माल्या की सम्पत्ति को ज़ब्त करना भी शुरू कर दिया है।
लेकिन एक बात है जो मुझे हमेशा ही समझ नहीं आती की क्या सिर्फ़ ये दोनों ही फ़्रॉड है पूरे देश में और आप सोच रहे होंगे की एसा इस लेख में क्यों कहा जा रहा है,इसका मेरे पास कारण है और अगर आप छानबीन करेंगे तो एसे लोग जिनकी सम्पत्ति ज़ब्त हुई है वो सिर्फ़ या तो बिज़नेस करने वाला है या कोई घोटालेबाज़ जिसका राजनीति से कोई लेना-देना नही है।
अब मेरा सीधा सा सवाल उन सभी लोगों से है जो किसी भी घोटालेबाज़ पर सख़्त कार्यवाही होने पर यक़ीन रखते है,हमारे देश में बहुत सारे घोटाले हुए है उन सबको मैं यहाँ नहीं बता सकता शब्दों की सीमा होने की वजह से लेकिन कुछ नेताओं के घोटालों पर प्रकाश डालना चाहूँगा और अगर आप ज़्यादा जानना चाहते है तो नीचे दी गयी लिंक पर जाकर पढ़े-
1.कोयला घोटाला, साल 2012:
घोटाले की रकम: 1.86 लाख करोड़
2.2जी स्पेक्ट्रम घोटाला, साल 2008:
घोटाले की रकम: 1.76 लाख करोड़
3.कॉमनवेल्थ घोटाल, साल 2010
घोटाले की रकम: 70 हजार करोड़
4.शारदा घोटाला, साल 2013
घोटाले की रकम: 10 हजार करोड़ रुपये
5.चारा घोटाला,साल 2013
घोटाले की रक़म :950 करोड़
इसमें से कुछ घोटाले के तो आरोपी तक भी सिद्ध नहीं हो पाए है पर कुछ के आरोपी जाँच में पकड़े गए जैसे की कोमनवेल्थ घोटाले के सुरेश कलमाड़ी ,चारा घोटाले के पढ़े-लिखे महाशय लालू यादव और बहुत लम्बी लिस्ट है लेकिन मुद्दा ये नहीं है की इनकी संख्या कितनी है मुद्दा ये है कि इन सबसे घोटाले के पैसे क्यूँ नहीं वसूले गए ,इनकी सम्पत्ति नीलाम क्यूँ नहीं की गयी ।क्या राजनेताओं के लिए क़ानून अलग है और उन लोगों के लिए भी क़ानून अलग है जो राजनीति से कोई सम्बंध नहीं रखते या ये क़ानून की किताबें सिर्फ़ इसलिए पढ़ी जाती है ताकि वक़ील बनकर उनकी मदद की जाए जो राजनीति से सम्बंध रखते है।
“यदि सुप्रीम कोर्ट सुब्रतो रॉय जैसे लोगों से पैसा वसूलने में इतना सख़्ती दिखता है तो लालू यादव ,के.राजा,सुरेश कलमाड़ी आदि से पैसा वसूलने में नरमी क्यूँ दिखाती है।”
क्या कोई एसी सरकार आएगी जो इन घोटालेबाज़ों से जनता का पैसा वसुल कर पाएगी,क्या कोई एसी सरकार आएगी जो अगस्ता वेस्टलेंड घोटाले के आरोपियों की सम्पत्ति वसुल कर पाएगी,लालू यादव से जनता के 950 करोड़ वसुल कर पाएगी ,सुरेश कलमाड़ी जो जेल में है से कॉमन्वेल्थ घोटाले के 70 हज़ार करोड़ रुपए वसुल कर पाएगी ,क्या इनमे से किसी एक की सम्पत्ति नीलाम कर पाएगी ।यह देखना ज़रूर रोचक होगा क्योंकि मौजूदा सरकार से जनता ने बहुत उम्मीदें लगाई हुई है।
भारत के हर एक नागरिक को इसके बारे में सोचना चाहिए क्योंकि ये घोटाले की रक़म इन नेताओं के पिताजी की नहीं है ,ये भारत की आम जनता व्यापारी,किसान और कई वर्गों की ख़ून-पसीने की कमाई है जो जनता टेक्स द्वारा जमा की जाती है ताकि जनता का और देश का विकास हो सके लेकिन उसका हिसाब जब जनता माँगती है तो सब एक दूसरे पर डालते है, तय हमें ही करना है इन घोटालेबाज़ों से पैसा कैसे वसूले या लालू जैसे लोगों को सिर्फ़ पाँच साल की सज़ा काफ़ी है और हो सकता है उनके बेटे राजनीति में उतर आए और पैसा कहीं जनता का तो नहीं ,ये कटाक्ष किसी भी रूप से किसी के लिए व्यक्तिगत नहीं है ।
लेखक किसी भी रूप से किसी भी बिज़नेसमेन को सपोर्ट नहीं करते इस लेख में सिर्फ़ एक ज्वलंत मुद्दे को उठाने की कोशिश की है ।
धन्यवाद