ईश्वर एवं प्रार्थना आस्था का विषय है, आप इसे किसी पर थोप नहीं सकते।

Posted by Anchal Shukla
April 19, 2017

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सोनू निगम के द्वारा एक के बाद एक लगातार किये गये 4 ट्वीट्स ने सोशल मीडिया में हड़कंप मचा दिया। एक तरह से उन्होंनें बहुत सही मुद्दा उठाया। उन्होंने किसी धर्म विशेष को लेकर ये टिप्पणी नहीं की है। अगर आप उनके ट्वीट ध्यान से पढेंगें तो आपको मालूम पड़ेगा की वहां मंदिर, मस्ज़िद और गुरूद्वारे का भी ज़िक्र किया गया है। लेकिन कई लोग इसे एक विशेष धर्म से जोड़ रहे हैं। लोगों ने उनके ट्वीट पर प्रतिक्रिया तो देना शुरू कर दिया लेकिन उनके कहने का मक़सद क्या था ये कम ही लोग समझ पाए। उनको किसी की प्रार्थना या अज़ान से नहीं दिक्कत है, उन्हें दिक्कत लाउडस्पीकर से है।

लेकिन उनकी बात को गलत मोड़ देते हुए लोग उनकी आलोचना करने पर उतर आए। लोग तब तक किसी की दिक्कत को नहीं समझते जब तो वो उनके साथ घटित ना हो जाये। ये लॉडस्पीकर चाहे मंदिर में लगा हो या मस्ज़िद में, अक्सर लोगों को जबरन ना चाहते हुए भी सुनना पड़ता है, क्यूंकि मजबूरी है कर क्या सकते हैं आखिर। हो सकता है कहीं किसी के घर में कोई बीमार हो, बच्चों के एग्जाम हों, किसी को चिंताओं ने घेर रखा हो, कई बार लोग ऑफिस से देर रात घर लौटते हैं तो उन्हें ऐसे में सुकून भरी नींद चाहिए होती है या स्कूल और कॉलेज में क्लास चल रही हो। फ़िर भी ना चाहते हुए भी हमको जबरन ये सब सुनना ही पड़ता है।

दिक्कत यही है कि हर किसी की हिम्मत नहीं होती बेबाकी से अपनी बात कहने की क्योंकि ये कड़वी होती हैं और सबको हज़म नहीं होती। इसीलिए सत्य परेशान हो सकता है लेकिन पराजित नहीं हो सकता। सबकी अपनी-अपनी मानसिकता जिसको जो सही लगे। लेकिन इस बात पर मैं सोनू निगम जी का पूरा समर्थन करती हूं। मैं यही कहूंगी कि उन्होंनें कुछ गलत नहीं कहा।

रेलवे के एक स्टेशनमास्टर ने अपनी बात लोगों से साझा करते हुए कहा कि सर मैंने रातभर जागकर ड्यूटी की है। मुझे पता है कि सुबह की नींद में खलल कितना पीड़ादायक होता है, अज़ान हो या भजन, कुछ नहीं सुहाता। प्रार्थना शान्ति के लिए की जाती है ना की किसी को कष्ट पहुंचाने के लिए। इस बात को समझने की ज़रूरत है कि प्रार्थना एवं ईश्वर किसी इंसान की आस्था का विषय है। ईश्वर को याद करने के लिए किसी भी तरह के लाउडस्पीकर के अनाउंसमेंट की क्या ज़रूरत है?

जिस इंसान ने अपनी पूरी ज़िन्दगी मो. रफ़ी साहब को अपना पिता माना हो। जिस इंसान के गुरु का नाम उस्ताद ग़ुलाम मुस्तफ़ा खान हो। उसके एक बयान को लेकर उस इंसान को मुस्लिम विरोधी कहना, उसके ख़िलाफ़ फ़तवा निकालना और उसके साथ इस तरह का व्यवहार सच में निंदनीय है। शर्म आती है ऐसे लोगों पर जो लाउडस्पीकर और धर्म के बीच अंतर नहीं समझ पाए। अगर सोनू निगम का बयान आपको गुंडागर्दी लगा हो तो, मुझे भी ये फ़तवा किसी गुंडागर्दी से कम नहीं लगा।

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