एक्जिट पोल नहीं, सड़क बताएगी कि कौन जीतेगा चुनाव

Posted by Sunil Jain Rahi in Hindi, Society
April 4, 2017

कौन सा उम्‍मीदवार जीतेगा, ये सड़क तय करेगी। सड़क किनारे मकान है, मकान के सामने खाई है, खाई सड़क में है। चुनाव तिथि घोषित होने से पहले सड़क की खाई भर जाती है। लगता है वर्तमान उम्‍मीदवार को जीतने की उम्‍मीद है। सड़क चिकनी हो जाती है। उम्‍मीदवार का मन साफ है। सड़क पर सफेदी की जाती है, उम्‍मीदवार वापस आने पर स्‍वागत चाहता है। सड़क के गड्ढे भरे नहीं जाते। उम्‍मीदवार मन से हार गया है। जीतने की आशा पर सड़क बनेगी और हारने की उम्‍मीद पर नहीं बनेगी। उम्‍मीदवार हारने वाला है। सी सी टी वी में हिचकोले खाते वाहन/एक दूसरे पर गिरते पड़ते वाहन/मोटरसाइकिल वाले रगड़ते निकलते नज़र आएंगे।

कुल मिलाकर सड़क सुधरने के फायदे कई हैं लेकिन पुरानी सड़क के मायने भी कम नहीं। आपकी बिटिया छज्‍जे पर खड़ी है, रोमियो की हिम्‍मत नहीं कि सड़क से नज़र हटा ले अगर देखा तो सीधा गड्ढे में। वाहनों की स्‍पीड कम हो जाती है, तेजी से निकलते आदमी के पिल्‍ले बच जाते हैं। सड़क की ऐतिहासिक जानकारी मिलती है, अकबर के जमाने की सड़क है या नये जमाने की। घर का गंदा पानी सड़क पर, गंदा पानी नाली के अलावा सड़क पर फेंक सकते हैं। सड़क में गंदगी और पानी दोनों समा जाते हैं। सड़क का टूटा-फूटा होना हमें हिल स्‍टेशन की याद दिलाता है, हम खुश हो जाते हैं कि हमारा मकान भी हिल स्‍टेशन पर खड़ा है।

सड़क से हमारा करेक्‍टर मालूम पड़ता है। सड़क जितनी साफ-सुथरी होगी करेक्‍टर उतना ही गंदला होगा। सड़क जितनी खुरदरी होगी करेक्‍टर उतना चिकना और साफ होगा। सड़क टूटी-फूटी होने से घर में समृद्धि आती है, सड़क खराब होने से मेहमान कम आते हैं। उनके आने से जो खर्च होता वह बच जाता है। घर की समृद्धि में चार चांद लग जाते हैं। सड़क हमारी राजनीति का आईना हैं, शहर की सड़कें बयां कर देती हैं कि किसकी सरकार आने वाली है।

इस बार मेरे मोहल्‍ले की सड़क ने नया रूप नहीं धरा लेकिन पास के मुहल्‍ले की सड़क चमाचम नजर आ रही है। उसका उम्‍मीदवार दोबारा टिकट पा गया है। हमारा उम्‍मीदवार खजूर पर आम की तरह लटका हुआ है, उसे पार्टी से टिकट नहीं मिला। हमारी सड़क अधर में लटकी है। हमारी सड़क बार-बार नहीं बनाई जाती। पड़ोस वाले मुहल्‍ले की सड़क हर साल नई हो जाती है। उस मुहल्‍ले के लोग हमारे उम्‍मीदवार को वोट नहीं देते। जिस दिन हमारे उम्‍मीदवार को विश्‍वास हो जाएगा कि दूसरा मोहल्‍ला भी उसे ही वोट देगा, बस वह सड़क भी हमारी सड़क जैसी हो जाएगी।

अब हमारी सड़क नहीं बनेगी, आचार संहित लागू हो गई है। आचार संहिता लागू होने के बाद सरकारी विकास के काम नहीं होते हैं, पार्टी विकास के काम होते हैं। आचार संहिता लागू होते ही गुण्‍डा संहिता लागू हो जाती है। एम.सी.डी. के चुनाव होने हैं। एम.सी.डी. शहर के रखरखाव के लिए चुनी जाती है। सफाई की जिम्‍मेदारी उसकी होती है, घर के सामने कचरा फेंकने की जरूरत नहीं है। अब विभिन्‍न पार्टियों के उम्‍मीदवार घर के सामने कचरा करके जाएंगे। पहले गंदगी करके जाएंगे, सफाई बाद में करेंगे। पानी की बोतल, ठंडे की बोतल, दारू की बोतल, चिप्‍स के पैकेट फेंकेगे। झंडा लगायेंगे, झंडा फाड़ेंगे, डंडे में झंडा और झंडे में आपको टांग कर जाएंगे। मतदाता काठ का उल्‍लू होता है चुनाव से पहले और चुनाव बाद भी। जिसकी सड़क चमक रही है, उसका उम्‍मीदवार जीत रहा है, जिसकी सड़क गड्ढे में है, उसका उम्‍मीवार भी गड्ढे में है।

फोटो आभार: Gurung Rajiv

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