कन्या_पूजन…

Posted by Shiv Pratap
April 4, 2017

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04.04.2017

#कन्या_पूजन

ऋद्धिमा अपनी सास के साथ लिफ्ट से निकली ही थी कि सरिता आंटी की आवाज सुनाई दी-

“अरे ठकुराइन दी, सुबह-सुबह इतना सामान लेकर कहाँ …”

“क्या बताएं…वो मुआ ड्राइवर है न…गाड़ी लेकर अपनी ससुराल चला गया…आपके भाईसाहब हैं न,सिर पर चढ़ा कर रखे हैं …ऐसा भी कोई करता है भला ?”

“मंदिर ही जा रहीं हैं न ?”

“हाँ , आज कन्यापूजन जो करना है l”

“तो हम किस मर्ज की दवा हैं …रामधन! दी का सामान भी गाड़ी में रखो l ”

“अरे आप बेकार में परेशान…”

“परेशानी की क्या बात है ? मैं भी मातारानी के दर्शन करने ही जा रही हूँ l ”

“तब तो ठीक है l”

“ऋद्धी की तबियत कुछ…”

“अरे तबियत क्या …वो सुबह जल्दी उठने की आदत नहीं है न… हम भी कहते हैं, भई आराम करो… कौनसा हमारे जमाने की तरह भोर से उठकर कुटाई-पिसाई करनी है l”

“सही बात है…लेकिन पुराने लोग ‘फिट’ भी रहते थे l”

“अरे हाँ ! मेरी सास के जमाने में नौमी को हम लोग भोर में उठकर गाँव से बीस कोस दूर पैदल ‘जात’ करने जाते थे…और वो तो लौटते में भी तांगे पर न बैठी कभी l कहती थीं कि घोड़ा उनके हिस्से का ‘पुन्न’ ले लेगा l”

“तब तो आपके हिस्से का पुन्य आज हमारी गाड़ी को मिल जाएगा l”

“हैंहैंहैं… आप भी अच्छा मजाक करती हैं l”

” वैसे भाईसाहब इस साल भी सामूहिक विवाह करा रहे हैं क्या ?”

“हाँ बिल्कुल… उनकी बड़ी ‘मनखत’ रही कि उनकी भी एक लड़की हो, जिसका अपने आँगन से कन्यादान कर सकेंl हमारी सास ने जब ‘पाँच पांडव’ शीतला मैया से नातियों के रूप में मांगे, तो इन्होंने भी एक लड़की सही-सलामत होने पर इक्कीस किलो पीतल का घंटा ‘बोला’ था … अर्जुन की ‘पीठ’ पर लगातार चार लड़कियाँ जन्मी…लेकिन छः महीने से ज्यादा एक भी …”

“ऋद्धी, बेटा आपने पूरे नौ दिन फास्ट किया क्या ..?, मुझे आपकी तबियत कुछ ठीक नहीं लग रही है l ” सरिता आंटी ने मंदिर की सीढ़ियां चढ़ते हुए कहा l

“नहीं तो..”

मंदिर में कन्याओं और पूजन करने वालों की भीड़ थी l

ऋद्धिमा की सास परेशान थीं क्योंकि नौ के बजाय केवल छः कन्याएं पूजन के लिए मिल पाने पर “पुन्न” अधूरा रहने वाला था l और खोई-खोई सी ऋद्धिमा थाली लगाते हुए इस अधूरेपन की पूर्ति हेतु शायद उन तीन कन्याओं का आह्वान कर रही थी जो उसकी कोख में “नौ” महीने भी पूरे नहीं कर पाईं थीं l

  • (मौलिक रचना )@SP…

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