कश्मीर में भारतीय सेना के साथ बदसलूकी पर सब चुप क्यों

Posted by Striver Prashant
April 15, 2017

Self-Published

स्ट्राईवर प्रशांत 

मधेपुरा,बिहार .

पिछले दिन से वायरल हो रहे कश्मीर में सेना के साथ बदसलूकी की क्लिप ने झकझोर कर रख दिया .ये क्या है ? दो दिन इस क्लिप को देख रहा हूँ .कश्मीर में हमारे देश के वीर सिपाहियों ने लोकतंत्र के महापर्व चुनाव को संपन्न कराने के लिए गये तो कुछ सिरफिरे लफंगे ने उनके साथ बदसलूकी किया ,उनका हेलमेट छीन कर फेंक दिया,उनके साथ धक्का मुक्की किया न जाने जाने क्या क्या किया.हमारे सेना तब भी स्थिति न बिगड़े चुपचाप हथियार रहने के बावजूद शांत होकर आगे बढ़ते रहे.अगर चाहते वो तो उन सिरफिरे का तुरंत काम तमाम कर सकते थे लेकिन अपने उच्च अधिकारीयों के चुप्पी के आगे वो कुछ नही कर सकते थे.चुपचाप लात घुसे खाते हुए आगे बढ़ते रहे.

आखिर वहां कौन सी ताकत काम कर रही है कि हमारे सेना के जवान के साथ एसा हो  रहा है और फिर सिंहासन पर बैठे राजनेता चुप है .प्रतिक्रिया में ये कहते है हमारे सेना का धेर्य है.हमलोग कहते है हमारे पूर्वज इतने शौर्य ,बलशाली थे फिर भी देश क्यों बंट गया ? क्या ये फिर और बंटवारा का सूचक नही है.कौन सी ताकत है कि इतने बड़े देश में जहाँ लोकतंत्र ही सर्वोपरी है में भारत के वीर सपूतो के साथ एसा हो रहा है सब चुप्प है.बड़े बड़े देश भक्त ,सामाजिक कार्यकर्ता ,सब कहाँ है आज . कभी सेना के साथ बदसलूकी, कभी भोजन में गड़बड़ी तो कभी उनसे अधिकारी निजी काम करवाएँगे इस पर कोई आवाज नही उठाएगा.

लगता है अब वो दिन दूर नही जब माँ अपने बेटे को सेना में भेजना बंद कर दे.ये नेतागिरी बस 5 साल की है .देश 500 क्या 5000 साल से भी ज्यादे की है .ये देश 125 करोड़ लोगों का है .इस पोस्ट को लिखने का बस एक मतलब है…… बस नेता जी के जय जय कहने से कुछ नही होगा.अपने देश के बारे में सोचिये ,आवाज उठाइए ,बीते दिन जो कश्मीर में हुआ ये घोर अन्याय ,बड़ा अपराध,हमारे अभिमान पर बड़ा चोट है.कोई एसा नेता नही है जो अपने आवाज को उठाये .

देश के लिए सेना लड़ता है, घर में घुसकर गोली ठोंकता है तब आप अपने सेना पर गर्व करते है .पिछले दिनों भारतीय सेना ने जब सर्जिकल स्ट्राइक किया तो सबों ने तिरंगा लहराया ,आतिशबाजी  किया कोई बड़े बड़े पोस्टर अपना बड़ा तस्वीर देकर जय भारतीय सेना का पोस्टर लगवाया  लेकिन आज क्या हुआ ?आज क्यों चुप है ? यार वो सीना पर गोली खाता है.हमलोग तो एक बात पर दुसरे को अस्पताल पहुंचा देते है.दिखावा वाला देशभक्ति न कीजिए ,कुछ सोचिये.किसी राजनेता में हिम्मत नही कि वो अपने पार्टी से उपर उठ इस सब के बारे में सोच सकते है.ये  वख्त है अपने से उठकर सोचने का ,देश के लिए सोचने का .अगर समय रहते हम नही जगे तो देश फिर से बंट जायेगा इसे कहने कोई अतिसियोक्ति नही.एक बार फिर जरूरत है तिरंगा के साथ भारतीय सेना के साथ हो रहे अन्याय और हो रहे भारत माता के साथ अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद करे.अगर देश में कोई एसा तत्व सक्रीय है जो भारत के विधि व्यवस्था पर खलल डाल रहा है तो उसे जरूरत है समाप्त करने की न कि उसे अब और मौका देने की.

 

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