क्या यह धर्मयुद्ध की आजादी थी?

Posted by Vivek Upadhyay
April 3, 2017

Self-Published

आजाद भारत। हमें एक आजादी मिली, कहने को तो वो गुलामी से थी। इसके बाद हमें जीने की, विचारों की और हर जगह घूमने की आजादी मिली। लेकिन बुर्जुगों की माने तो उस आजादी के साथ शुरु हुआ धर्म-धर्म का झगड़ा। जिसके पीछे कई युद्ध भी हो चुके हैं। तो क्या यह धर्मयुद्ध की आजादी थी? हम अंग्रेजों की गुलामी से तो आजाद हो गए, लेकिन धर्मों के ठेकेदारों ने हमें जकड़ लिया। अब हम अपने धर्म को बचाने के लिए लड़ रहे हैं जो सही भी है। क्योंकि भारत एक धर्म प्रधान देश है और धर्म से ही हमारी पहचान है। लेकिन धर्म के नाम पर लड़ाई और युद्ध तक हो जाना कहां तक सही है। हम येभी जानते हैं कि कई धर्म के ठेकेदार इसका गलत उपयोग भी करलेते हैं। झूठे वादे करके नेता वोट भी लेते हैं और चुनाव भी जीत जो हैं। इतना सब कुछ जानने के बाद भी हम लड़ रहे हैं। आखिर ऐसा क्यों? आखिर हम कब इस युद्ध से, कब इन प्रथाओं से आजाद होंगे। कहीं गोरे-काले का भेद है तो कहीं ऊंच-नीच का या फीर अमीर-गरीब का। आखिर ये भेद क्यों?क्या हम कभी इन युद्ध से या इन सभी युद्ध कराने वाले प्रपंचों से भारत को आजादी नहीं दिला पाएंगे। अगर दिला पाएंगे तो आखिर कब? और कैसे?हमारे नेता धर्म के नाम पर सिर्फ इसलिए हमें उकसाते हैं, ताकि उनका वोट बैंक बना रहा। वह अपनी कुर्सी के लालच में हमें लड़ा रहे हैं। वही अंग्रेजों ने भी किया था। पहले वो कर गए अब हमारे द्वारा चुने गए नेता यह काम कर रहे हैं। यह सब बात हम जानते भी हैं, इसके बावजूद सभी चुप हैं। आखिर ऐसा क्यों?

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