ख़बरदार! दिल्ली को दहलाने MCD चुनाव आ रहे हैं

Posted by Sunil Jain Rahi in Hindi, Politics, Society
April 3, 2017

फिर चुनाव आ रहे हैं। इस बार दिल्‍ली दहलाने के लिए कुछ राष्‍ट्रीय/प्रादेशिक पार्टियों के समूह आ रहे हैं। ध्‍यान रहे, इनके खिलाफ पुलिस नहीं है, पुलिस इनके साथ है, नेता इनके साथ हैं, विपक्ष भी साथ में है और पक्ष तो है ही। महिलाओं और बच्चियों से निवेदन है सलवार सूट पहनकर न निकले और निकलें तो दुपटटा बांध कर चलें। मोटर साइकिलों पर सवार ये टोपियों जहां भी दिख जाए वहीं फौरन किसी भी भाई के घर शरण ले लें, चाहे वह हिन्‍दू हो या मुसलमान क्यूंकि ये धर्म निरपेक्ष गुण्‍डे हैं।

अपनी पार्टी का प्रचार करने निकले हैं। इनसे जनता तो भयभीत है। पुलिस चुप है क्यूंकि पुलिस जानती है इनमे से ही कोई बाप बनने वाला है और इनको ही सलाम करना है। ये चुनाव कुछ और ही करके दिखायेंगे। हर कोई ताल ठोंक रहा है, कोई पार्टी में आ रहा है तो कोई पार्टी से जा रहा है। जिसको टिकट मिला वह भी जीत गया जिसको नहीं मिला वह दूसरी पार्टी के टिकट पर जीत गया।

हे कर्मवीरों 23 मई तक जितना उत्‍पात मचा सकते हो, मचा लो। बाद में तो आने वाली सत्‍ता के गुण्‍डों का राज होगा। जितना पी सकते हो पी लो, हुडदंग होली पर नहीं मचा पाए। तुम्‍हारी असली होली 23 मई के बाद होगी। किसी का मुंह काला तो किसी का रंग सफेद होगा। पिछले बीस सालों में ऐसा चुनाव नहीं देखा। मोटरसाइकिलों का ऐसा काफिला नहीं देखा। दो आदमी आगे, सौ मोटर साइकिल पीछे। रोड जाम है, जनता जाम है, दुकानों पर खरीददार और बेचने वाला जाम है। जो जहां खड़ा है, वहीं जाम है, सड़क जाम है, सड़क का संचालन नेता के गुण्‍डों के हाथ में है।

दुकानों पर सहमे खड़े लोग, साइकिल रिक्‍शा में सहमी बिटिया है। अभी तो एक पार्टी की सरकार बनने वाली है, दूसरी पार्टी की सरकार बनाने वाले भी आएंगे और इसी तरह गुर्रांएगे। इनका शोर सुनकर गली के सारे चुप हैं। बस इनका हल्‍ला है, बाकी सब जाम है। आप देखते रहें, स्‍वयं को संभाले। इनका विरोध नहीं करें, इनका समर्थन करें, इनको पानी पिलायें, इनकी हां में हां मिलायें। अगर स्‍वयं पत्‍नी के साथ हैं या बिटिया के साथ हैं तो चुपचाप साइड हो जाएं। इनसे नज़रे न मिलायें।

ये प्रमाणित गुण्‍डे हैं। ये झुण्‍ड में हैं, झुण्‍ड में जंगली जानवर भी होते हैं। झुण्‍ड के जानवर काफी हिंसक होते हैं। वे शिकार ढूंढते हैं, इनके शिकार मत बनिये। 23 तारीख तक चुपचाप इनकी कर्मलीला देखते रहिए। आप इन दिनों स्‍वयं को मूक बधिर मान कर चलें। वैसे भी देश का नागरिक मूक है, बधिर है। नेता बोलता है, जनता सुनती है, जनता देखती है। तालियां बजाती है, तुम तालियां बजाओ। चाहे कोई भी आए, तुम्‍हें तो स्‍वागत करना है, मण्‍डप सजाना है। इनको माला पहनानी है, रैली में शामिल होना है। कुत्‍तों की दुम गायब हो गई हैं, अब तुम्‍हें पूंछ लगाकर उनकी कमी पूरी करनी है। इन जीते हुए तेंदुओं के लिए शिकार पेड़ से बांधना है।

अब परम्‍पराएं समाप्‍त हो रही हैं। हाथ जोड़कर वोट मांगने वाले अब नजर नहीं आ रहे। पैर छूने वाले नेताजी दिखाई नहीं दे रहे हैं। बहन जी, माताजी कहने वाले गायब हो रहे हैं। भाई साहब कह कर गले लग जाने वाले, ओए पुत्‍तर कहने वाले, बेटा कहने वाले इस चुनाव से गायब हो रहे हैं। जो भी आ रहा सीना फुलाकर अकड़ के साथ आ रहा है, वोट ऐसे मांग रहा है, जैसे बैंक वाले कर्जा मांगते हैं।

हे प्रिय जनों अपनी लाज बचाने के लिए इनसे दूर रहो। इन्हें देखते ही दरवाजे बंद कर लो। डाकुओं के डर से गावं वाले छिप जाते थे, वैसे ही छिप जाओ। पता नहीं ये आपका क्‍या लूट कर चले जाएं। इमान, इज्‍जत, सम्‍मान इन सबको बचाना है तो अपने दरवाजे बंद और कान-आंख खोलकर रखें। खुद सुरक्षित रहे, परिवार को सुरक्षित बचायें, स्‍वयं की सुरक्षा-स्‍वयं के हाथ।

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