खेत खलिहान: देश कृषिप्रधान और अन्नदाता इतना परेशान?

Posted by Rana Ashish Singh
April 14, 2017

Self-Published

 

(रायबरेली नाम को राणा बेनी माधव से जोड़ लें, महावीर प्रसाद द्विवेदी से या मालिक मोहम्मद जायसी से, बहुत समृद्ध इतिहास और साहित्य रहा है. यहाँ के किसानों को अंग्रेज़ों को मुंशीगंज का पुल पार नहीं करने दिया था जब वे अपनी पर आ गए थे तो. करीब पैंतीस लाख की आबादी वाला यह शहर चार हज़ार छह सौ वर्ग किलोमीटर में फैला है. सब कुछ के बावजूद यहाँ के किसानों की हालत कोई बहुत अच्छी नहीं है.
गोविन्द ने किसानों को जैसा देखा वैसे ही लिखने की कोशिश की है. सार साफ़ है, बाक़ी कहानी कोई नयी नहीं है) 


#एक_वैश्विक_न्यूज़_एजेंसी_की_वेबसाइट_के_अनुसार_1995_से_लेकर_अब#से_लेकर_अब_तक_लगभग_300000_किसानो_ने #आत्महत्या_की_है

भारत एक कृषि प्रधान देश है, कृषि प्रधान देश होते हुए भी हमारे देश में किसानों की इतनी उपेक्षा क्यों होती है क्यों किसान को हे दृष्टि से समाज देखता है वह किसान यदि अन्न उगाना बंद कर दे तो पूरे समाज को भूखों मरने की नौबत आ जाए उसको आम जनमानस व सरकारें आखिर कब तक उपेक्षित करते रहेंगे.किसान या अन्नदाता दिनभर धूप में, गर्मी में, बरसात में या फिर कड़ाके की सर्दी में भी खेतों में काम करते हैं और अनाज का उत्पादन करते हैं।

देश मे किसान ज्यादातर गांव में रहते हैं और ज्यादातर किसान गरीब हैं क्यो कभी सोचा आपने कि ऐसा आखिर क्यो ?????

उस देश में जिस देश को कृषि प्रधान देश का दर्जा दिया जाता है जिस मुल्क को किसानों की वजह से पूरे विश्व में जाना जाता है उस देश में आखिर किसान की स्थिति ऐसी क्यों है???

किसान को सुबह-सुबह ही अपने खेत के काम के लिए निकलना पड़ता है और वह दिनभर खेतों में काम करते हैं। फसल उगाना एक बहुत ही मेहनत और थका देने वाला काम है,लेकिन फिर भी किसान इसे पूरा करते हैं। किसान की मेहनत के कारण ही हम सभी लोगों को सस्ते में अनाज मिल पाता है। किसान को खेती करने के लिए काफी पैसे खर्च करने पड़ते हैं। आमदनी कम होने की वजह से बहुत सारे किसान कर्ज लेते हैं और बहुत सारे किसान धीरे-धीरे कर्ज में डूब जाते हैं।

ज्यादातर किसानों को पढ़ने-लिखने का समय भी कम मिलता है जिसके कारण से अधिक नहीं पढ़ पाते हैं। कम पढ़े होने की वजह से बहुत सारे लोग उन्हें ठगते हैं। हम सभी लोगों को चाहिए कि किसानों को मदद करें और उन्हें शिक्षित करने का प्रयास करें। हमें अपने आस पड़ोस के किसानों को इतनी शिक्षा देने का प्रयास करना चाहिए जितनी से वह ठगी कर रहे थे ठगी का शिकार होने से बच सकें यह हमारी आपकी सबकी नैतिक जिम्मेवारी है क्योंकि वह अन्नदाता हम सब का है.

कभी सोचते हुए बने तो सोचिए कि वह भारत देश की आबादी का सबसे बड़ा हिस्सा जो कि अपने आप को अन्नदाता कहलाने में भरोसा रखता है कभी ऐसी दशा क्यों आ जाती है कि #अन्नदाता कहलाने वाले किसान को #आत्महत्या करनी पड़ती है क्यों वह किसान इतना परेशान हो जाता है जो मेहनतकश जीवन जीने के लिए अंदर से अपने आप को प्रेरित करता रहता है जो शहरों में रहने वाले लोगों को या यूं कहें कि समाज में रहने वाले लोगों को दो वक्त की रोटी के लिए अनाज धरती का सीना चीर कर पैदा करने के लिए मेहनत करता है उसकी उपेक्षा आखिर कब तक होती रहेगी तब तक किसान मजबूर होकर आत्महत्या करता रहेगा उन समस्याओं को टटोलना होगा जिनके कारण भारत देश के अन्नदाता को उस सकारात्मकता से हटकर जिसकी वजह से वह चाहे धूप हो जाना हो गर्मी हो बरसात हो अपने खेतों पर मेहनत करने के लिए डटा रहता है फसल को बोलने से लेकर काटने तक की सारी जिम्मेदारी को बखूबी निभाता है उसके बाद ऐसी कौन सी समस्याएं रहती हैं कि उसको आत्महत्या जैसी कायर हरकत करनी पड़ती है जरा सोचिए कि क्या हम किसान की इन समस्याओं को तलाश कर ऐसी समस्याओं को जड़ से खत्म करने के लिए छोटे-छोटे कदम उठा सकते हैं या नहीं .

अन्नदाता आखिर समाज की #आधारभूत_सुविधाओं को लेकर वंचित क्यों वह आधारभूत सुविधाएं जो हर व्यक्ति की आवश्यकता होती है वह देश के उस बड़े आबादी के वर्ग के पास क्यों नहीं क्या उन सुविधाओं का लाभ उठाने का हक उस अन्नदाता को नहीं है जो भी समाज की आधारभूत सुविधाएं हैं चाहे वह #सड़क_पानी_बिजली_खाद_बीज, इन सब से संबंधित ही ज्यादातर समस्याएं अन्नदाता को होती है इन तीन आधारभूत समस्याओं से अन्नदाता को कब छुटकारा मिलेगा कब वह खाद पानी बिजली सड़क इन सब जैसी मूलभूत व्यवस्थाओं को अपने आसपास पाकर अपने किसान होने पर अन्नदाता का तमगा दिए जाने पर अपने आप के कंधों को न जाने कब वह अन्नदाता ठोकता हुआ नजर आएगा कब अपने आप पर फक्र करता हुआ नजर आएगा वह अन्नदाता न जाने कब?
(एडवोकेट गोविन्द सिंह चौहान संस्थापक/राष्ट्रीय प्रमुख आज़ाद शक्ति सेवा संगठन. Email id [email protected])

(आशीष सिंह, इंस्टिट्यूट ऑफ़ गवर्नेंस, पॉलिसीस एंड पॉलिटिक्स, दिल्ली में सीनियर रिसर्चर हैं साथ ही आज़ाद शक्ति सेवा संगठन के राष्ट्रिय सचिव और यूथ इन सोशल एक्शन सोसाइटी के सलाहकार समिति सदस्य हैं। ईमेल[email protected])

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