चोर उचक्का चौधरी, कुटनी भई प्रधान

Posted by Ankur Ranjan
April 26, 2017

Self-Published

हिंदी में एक कहावत है “चोर उचक्का चौधरी, कुटनी भई प्रधान”| अर्थ समझाने की जरुरत नहीं , आजकल सोशल मीडिया पर विद्वान् लोग ही पाए जा रहे हैं| आज भारतीय जनता पार्टी ने अपने विजय रथ को बढ़ाते हुए दिल्ली नगर निकाय चुनाव में जीत हासिल की है और राजनितिक शूरता का प्रमाण भी साबित किया है | मगर दुःख की बात तो ये है कि आने वाले दिनों में आम आदमी पार्टी को दिल्ली में हवेली पर भी बुलाने के लिए कोई राजी नहीं होने वाला| बड़ी ही विचित्र परिस्थिति है| एक ओर भारत देश की अभूतपूर्व लोकतान्त्रिक व्यवस्था जिसने यह साबित कर दिखाया है कि चाहे कितनी भी झांसे हमें दिला दो, ऊँगली तो उसी बटन पर आ कर रुकेगी जो उम्मीदें पूरे कर के दिखाए|

साल 2013 ओर ध्यान आकृष्ट करना चाहूँगा| जन लोकपाल बिल की उम्मीदों के सहारे तथा अन्ना हजारे के आशीर्वाद लेकर पहली बार दिल्ली विधानसभा में अपनी किस्मत आजमाने उतरी आम आदमी पार्टी ने 70 विधानसभा सीटों में से 28 सीटें जीतकर कांग्रेस की सहायता के सर्कार गठित की और 49 दिनों के बाद ही विधानसभा भंग कर दिल्ली जैसे राज्य को बीच मझधार में लाकर खड़ा कर दिया|

अगले एक वर्षों तक झूठी दिलासा देकर आम आदमी पार्टी ने अगले साल ही विधानसभा में 67 सीटों पर कब्ज़ा कर सर्कार बने| मगर हिंदी में एक और भी कहावत है “अन्धे के हाथ बटेर”| चले थे दिल्ली सुधारने, लड़ बैठे राज्यपाल से| फिर कहते फिरते है हमें मोदी जी ने काम करने नहीं दिया |

अरे जनाब आप एक जगर स्थिर तो रहिये| कभी प्रधानमंत्री बन्ने का ख़्वाब देखते हैं तो कभी दिल्ली को लन्दन बनाने का| आरोप पर आरोप लगते हो आप दूसरों पर| दिल्ली के घरों में लाइट चली गयी:- ये तो केंद्र के हाथ में है, मोदी जी जवाब दो | दिल्ली की सड़कों पर छेड़खानी हो गयी:- पुलिस केंद्र के हाथ में है, मोदी जी जवाब दो| अरे जनाब अगर किसी के घर लड़के की जगर लड़की पैदा हो गयी तो कहेंगे:- स्वास्थ मंत्रालय केंद्र के पास:- मोदी जी जवाब दो? तो वाज़िरेआजम ,आप कब जवाब दोगे|

और अगर जवाब नहीं दोगे तो भाई चुनाव में यही मिलेगा| विधानसभा का चुनाव नजदीक है| उम्मीद है इस बार जमाना जब्त होने वाली  संख्या में इजाफा न हो.

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