जख्मी कश्मीर

Posted by Neeraj Tiwary
April 11, 2017

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कश्मीर का युवा अगर बेरोजगार और अशिक्षित है तो अगर सरकारें चाहें तो क्या ये बेरोजगारी और अशिक्षा खत्म नहीं हो सकती ??

हर मर्ज का इलाज पैलट गन और गोली बंदूक नहीं है, सरकार को यह समझना होगा।

उद्योग धंधे स्थापित कर वहां के बेरोजगारों​ को रोजगार और अच्छे शिक्षा केंद्रों की स्थापना कर अशिक्षितो को शिक्षित करने के दिशा में अगर प्रयास किया जाए तो एकदम तो नहीं पर धीरे धीरे कश्मीर की स्थिति में परिवर्तन देखने को मिल सकता है।

यासीन मलिक और गिलानी जैसे अलगाववादी नेताओं पर हर साल खर्च होने वाले ३००-४०० करोड़ रुपए को अगर ऐसे व्यक्तियों या संगठनों पर खर्च किया जाए जो कश्मीर की बेहतरी के बारे में सोचते हैं और कश्मीर के भविष्य को भारत के साथ जुड़ा हुआ मानते हैं
तो फिर ऐसे व्यक्ति और संगठन मजबूत होंगे और फिर लोग इनका अनुसरण करगें ना कि उन अलगाववादिओं की।

प्रधानमंत्री अगर अगर अपने राज का विस्तार करने के लिए ३ दिनों तक यूपी में रुक सकते हैं
तो अपने कीमती समय में से ३ दिनों का समय निकाल कर कश्मीर हो आएं और वहां के लोगों का हाल चाल जान लें तो शायद कश्मीरियों​ को भी अपनेपन का एहसास हो और उनके जख्मों पर मरहम लगे,

क्योंकि वास्तव में कश्मीर जख्मी है और उसका इलाज करने के बजाय उस पर और पैलट गन और गोली बंदूक दागे गए तो जख्म और बढ़ेगा।

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