इस इंसान ने ठान ली है मध्यप्रदेश के स्कूल के बच्चों को साफ पानी पिलाने की

Posted by Ramkumar Vidyarthi in Environment, Hindi
April 9, 2017
महेश कुमरे

महेश  कुमरे  की प्राथमिक चिंता स्कूल के बच्चों के लिए पीने के पानी की समस्या है। इसके लिए वे शासकीय शिक्षकों व अन्‍य पालकों के साथ प्रयासरत हैं। उन्होंने पीएचई ,जनपद पंचायत,ग्राम पंचायत, बी.आर.सी.सी. से मुलाकात कर यह  समस्या बताई और शाला प्रबंधन समिति की बैठक में प्रस्‍ताव बनवाया है।

महेश कुमरे मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के शाहपुर विकासखंड में ग्राम धासंई में रहते है। ग्राम धासंई शाहपुर से 24 किलोमीटर की दूरी पर
है। महेश के तीन बच्चे हैं। सचिन, सरिता व सागर। सचिन आंगनवाड़ी में जाता है वहीं सरिता कक्षा 5 में व सागर कक्षा 4 में पढ़ाई करते  हैं। धांसई गांव में पानी का स्‍तर कम है, गांव में लगे हैंडपंपों में भी पानी कम आता है। प्राथमिक व माध्‍यमिक स्‍कूल एक ही जगह पर है। स्‍कूल में जो हैंडपंप खोदा गया था, उसके पानी में लेड की मात्रा होने व जंग के कारण पानी, पीने योग्‍य नहीं रहा इसलिये इस हैंडपंप को बंद कर दिया गया है। फ़िलहाल स्‍कूल में पीने का पानी गांव के हैंडपंप से लाया जाता है।

गांव के स्कूल की जर्जर हो चुकी छत की मरम्‍मत पर जब बजट की कमी हुई तो महेश और शाला प्रबंधन समिति से जुड़े पालकों ने छत की मरम्‍मत के लिये श्रमदान करके काम पूरा कर दिया। इस प्रयास से महेश के पानी लाने की मुहीम और तेज़ हो गई। इस मुहीम में शाला प्रबंधन समिति धांसई के कमल सिंह कुमरे शिक्षक रामपाल उइके शिक्षक कमल मर्सकोले जुड़े हुए हैं। बच्चों के हक़ में शिक्षक और पालकों के बीच बना यह रिश्‍ता स्‍कूल के प्रति समुदाय के विश्‍वास को मजबूत करता है।

शाहपुर क्षेत्र के स्कूलों में काम करने वाली संस्था एकलव्य से जुड़े निदेश सोनी बताते हैं कि आज भी कई गांवों में स्कूल में पानी की व्‍यवस्‍था करना टेढ़ी खीर है। इसके लिये सरकार और समुदाय को साझे प्रयासों की जरूरत है। महेश कुमरे जैसे पालकों का बच्चों को पेयजल दिलाने की यह मुहीम किसी भागीरथी प्रयास से कम नहीं है।

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