जिन्हें लगता है क़ि औरतों में दिमाग कम होता है।

Posted by Gunjan Jhajharia
April 12, 2017

Self-Published

 

मैं शिवांगी जी को फॉलो करती हूँ,
और ये वीडियो हर औरत के साथ हर आदमी को देखना चाहिए, जिन्हें लगता है क़ि औरतों में दिमाग कम होता है, या उनके डिसीजन सही नहीं होते, या वो प्रैक्टिकल नहीं होती, या वो समझदार नहीं है,
या ऐसा कुछ भी
देखो, तुमने पैदा करने की शक्ति को उसकी कमज़ोरी बना दिया, उसकी जिम्मेदारी बना दिया, उसका ही काम है-ये कह दिया।
अरे वो ही ये कर सकती है, तुम नहीं, जैसे तुम बच्चों को प्यार लाड सब अच्छे से दे सकते हो, लेकिन तुम्हें चुनना नहीं आता, कि कब समझाना है, कब बताना है, कब सिखाना है, वो सिर्फ माँ ही कर पाती है। तो तुम खुद को ज्यादा समझदार दिखाने पर क्यों तुले रहते हो?
माँ प्रकृति है, वो समझती है। घर में भी कौनसी चीज़ कब चाहिए होगी, जिंदगी में भी कौनसा डिसीजन सही रहेगा, ये सब बातें औरतें करती हैं तो तुम्हें लगता है फालतू सोचती है, ज्यादा दिमाग खाती है।
तो आप समझिये की औरत में एक अलग सी भविष्य सूंघने की शक्ति होती है, कुछ सही है या गलत उसे वो भांप लेती हैं, यद्यपि उनके पास कोई प्रूफ नहीं होता अपनी बात का।
हाँ, औरतों में गज़ब का सिक्स सेन्स होता है।
मैं ये नहीं कहती कि उनकी हर बात मानो,  लेकिन सुनो, कहने दो, समझो कि वो क्या कहना चाहती हैं।
हमारे शास्त्रों में यूँ ही नहीं लिखा है,
“यत्र नार्यस्तु पूज्यते,
रमन्ते तत्र देवता”
इसका मतलब ये नहीं कि नारी को बैठाकर, घूँघट निकवाकर, उसके पैर धोएं, और सजा कर उनकी आरती उतारें।
इसका साफ़ मतलब यही है क़ि जिस घर में उनकी बात को तवज्जो दी जाती है, जहां उनकी बात सुनी जाती है, समझा जाता है उनकी भावनाओं को, मन में किसी सेक्स सेन्स की अनहोनी से हुई बेचैनी को,  वहाँ सब अच्छा अच्छा ही होता है।
और यही मैं अपनी सभी प्यारी सखियों और चंचल चिड़ियाओं से कहूँगी,
जियो खूब, जी भर कर जियो। समझो और सुनो अपनी भीतरी शक्तियों को, प्रकृति में सब बैलेंस्ड है, अगर पुरुष को फिजिकली थोड़ा ज्यादा स्ट्रांग बनाया गया , तो लड़कियों को मेंटली थोड़ा ज्यादा मजबूत बनाया है। अगर लड़के थोड़े ज्यादा गणित, ऑटोमोबिल्स और इंजीनियरिंग में अच्छे हैं, तो लड़कियां थोड़ी ज्यादा स्ट्रेटेजी, प्लानिंग और कला में अच्छी हैं। सबकी अपनी अपनी कुछ विशेषताएं हैं, पर लड़कियों को कभी भी अपना आत्मविश्वास और डिग्निटी नहीं खोनी चाहिए।
और इस लेख को पढ़ने वाले सभी लड़को से कहूँगी,
अगर तुम्हारे मन में किसी लड़की के लिए कुछ है, जिससे तुम्हारी बात होती है या आमना-सामना होता है, तो तुम इस ग़लतफ़हमी में कभी न रहना कि तुम छुपा सकोगे। लड़कियों का सिक्स्थ सेंस बहुत ज्यादा अच्छा होता है। वो आदमी की नज़रों में पढ़ लेती हैं, और अगर तुम्हें लग रहा है तुम प्रपोज़ करोगे तो ही उन्हें पता लगेगा तो तुम गलत हो, हाँ ये लड़की-लड़की पर निर्भर करता है कि वो ना समझने का नाटक कब तक कर पाती है ।
लेख लिखने का मकसद बस यही, कि एक-दूसरे की विशेषताओं और भिन्नताओं यानि डिफ्फरेन्सेस को स्वीकार करिये। ना कि तुम ऐसी हो, या तुम वैसे हो कहकर एक-दूसरे को नीचा दिखाएँ। सबमें कुछ अलग और बहुत अच्छा होता है।

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