डमरू जैसी सियासत

Posted by Mudassir Ali
April 29, 2017

Self-Published

देखा जाये तो 2017 वर्ष अपने सुरूर पर है। सियासत दानों का सियासी खेल जारी है। रोजमर्रह की जनता की परेशानी को दूर छोड़ते हुए। आज हमारे सियासी लीडर साम्प्रदायिक विशेष की गुत्थी में हमको ऐसा उलझा दिया है कि आम जनता चाह कर भी इससे आगे की नहीं सोच सकती। मुझे याद है मुझसे किसी बाहरी मुल्क के के भाई ने सवाल किया था कि हम लोग चाँद से मंगल तक पहुच गए है। तुम्हारे देश कहाँ तक पहुचा। में एक आम भारतीय की तरह उसको अपनी अपनी उप्लभदिया गिनवाईं पर दिल में ठीस उठ रही थी क्या हम सच में वो कारनामे किये है। दिल मन ही मन बोल रहा था जब आप चाँद पर गए थे। तब हम छुत अछूत की लड़ाई लड़ रहे थे। और आप आज मंगल तक पहुचे है तो हमारी सियासत बेरोजगारी, शिक्षा को छोड़ कर आज जाती धर्म के डमरू बजा रही है और मेरे मुल्क की जनता बजरही है। इसी लिए आज का युथ राजनीति को गन्दी कहता है। क्या सच हमारी राजनीति साम्प्रदायिक हो गई है। या हम इससे ऊपर सोचना ही नहीं चाहते क्यों  कहा गया वो नारा जो हम बचपन में गुनगुनाते थे सारे जहाँ से अच्छा हिंदुस्तान हमारा हम बुलबुले है इसके ये गुलसिता हमारा। में नहीं कहता सारी देश की राजनीति गन्दी होगई है । यकीनन कीचड में फूल भी खिलते है। पर वो भूल खुशबू देने से पहले ही तोड़ लिए जाते है। में जानता हूं हमारा देश एक दिन सुपर पावर बनेगा। यक़ीनन हमको उम्मीद है पर हम कब डमरू बनना छोड़ेंगे। कभी तन्हाई में ये सवाल जरूर करना अपने मन से। इन्ही अल्फाज़ो के साथ आप को अपने मन की पीड़ा समझाई उम्मीद है आप समझेगे और हमारा देश सुपर पावर देश बनेगा।

जय हिंद जय भारत

मुदस्सिर अली

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