डिजिटलीकरण उर्फ अंधाकरण

Posted by Sunil Jain Rahi
April 14, 2017

Self-Published

डिजिटलीकरण उर्फ अंधाकरण
सुनील जैन राही
एम-9810960285
सरकार कहती है डिजिटलीकरण करो। बैंक कहते हैं- अंधाकर1ण करो। जब अंधे बैंक लूट सकते हैं, तो बैंक कर्मचारियों को अंधा नहीं कहा जा सकता। आप कैश लेस होना चाहते हैं। बैंक वही तो कर रहे हैं। आपको कैश लेस और खुद को कैशवान। बैंक नारा देती है-रिश्तों की जमा पूंजी-आपको समझ में नहीं आता है। तो समझ लिजिए रिश्ते, उनके रिश्तेदार उनके, संबंध उनके, संबंधी उनके और जमा पूंजी आपकी। आप जमा करते जाइए और भूलते जाइए। गलती आपकी हो या बैंक की, ब्याज तो बैंक काट ही लेगा। ए टी एम कार्ड आपका, पिन कोड आपका, आपके पास पिन कोड, पिन कोड दिया बैंक ने, जिसने दिया उसका पता नहीं, आपको भी पता नहीं किसने दिया पिन कोड। आपने पिन कोड बदला, आपको पता है, लेकिन किसी और को पता नहीं। आप बैठे दिल्ली में आपके ए टी एम से पैसा निकला अमरीका। आप हैरान हैं। पत्नी तोहमत लगाती है। कौन बैठी है मुए अमरीका में। हमारे लिए तो साड़ी के पांच हजार नहीं निकलते, उसके लिए 24 हजार निकाल दिए। हमें तो कभी ए टी एम का पिन कोड नहीं बताया, जैसे मैं ही दुश्मन हूं और वह कलमुंही तुम्हारी कौन लगती है, जो 24 हजार निकलवा दिए।
आप समझाते हैं, गलती बैंक की है। आप लाख कोशिश करते हैं, लेकिन मामला शांत नहीं होता। आप परेशान है और परेशानी अब घर में घर कर गई। आप निकल पड़ते हैं बैंक के धक्के खाने। आइए धक्के खाते हैं, बैंक के, बैंक अधिकारियों के, ए टी एम अधिकारी के, आपका खाता संभालने वाले कर्मचारी के। आपको बडे अदब से कहा जाएगा। मे आई हैल्प यू। नहीं इसका अर्थ है, मैं आपकी कोई मदद नहीं कर सकता। आप कहेंगे मेरे ए टी एम से पैसे निकले, निकले होंगे, हमें क्या पता। हम तो जमा करते हैं। निकालते तो आप हैं। आपको देखना चाहिए, आपके पैसे कैसे निकले। आप पूछेंगे-उस ए टी एम का नम्बर और पता बताइए। वे कहेंगे। हमने आपसे हैल्प करने के लिए कहा है। ये कोई पोस्ट आॅफिस नहीं है कि हम आपको गली-मोहल्ला और पता बताते फिरे। ये हमारा काम नहीं है। हमारा काम है आपकी हैल्प करना। आपके पैसे जमा करना, माल्‍या को कर्ज देना।
हम कैसे हैल्प करते हैं आपको मालूम होना चाहिए। जब आपको रुपयों की सख्त जरूरत की होती है, हम हिसाब लगाकर हड़ताल कर देते हैं। आपको पैसा नहीं मिले, आप परेशान हों। हमें बड़ा अच्छा लगता है, जब कोई रुपये के लिए परेशान होता है। ए टी एम खाली, बैंक बंद, बैंक कर्मचारी हडृताल पर। हम क्यों न खुश हों। हमारे सामने करोड़ों रुपये पड़े होते हैं, लेकिन हम खर्च नहीं कर सकते। हम लोन दे सकते हैं, लेकिन खर्च नहीं कर सकते। आपको पैसे की जरूरत है, हम ए टी एम मशीन में पैसा ही नहीं डालते हैं, कर लो क्या कर लोगे। आप दूसरी बैंक के ए टी एम पर जाओगे, प्रति ट्रांजिक्शन हमको बीस रुपये मिलेगा। हमें भी तो तन्खा देनी है, आपकी जेब काट कर ही तनखा देंगे हम। हम तो रिश्तों में विश्वास रखते हैं। हम रिश्ते बनाते हैं, गले मिलते हैं और पर्स उड़ा लेते हैं। आप तंग हो जाते हैं। बैंक के अंधाकरण से। गुहार लगाने पहुंच जाते हैं, थाने में।
बेटी ब्याहना आसान है, लेकिन थाने में रपट लिखाना उतना ही मुश्किल। थाने में हिन्दी में लिखा होता है-मैं क्या आपकी मदद कर सकता हूं। आप शुरू हो जाते हैं। आप अश्रूपूरित श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए बैंक मैनेजर से लेकर बाबू तक की कहानी सुनाते हैं। आपकी कहानी बड़े इत्मीनान से सुनी जाती है और फिर शुरू होता है अंधाकरण।
आपका खाता किस बैंक में है। आपने उस बैंक में ही खाता क्यों खोला, दूसरे बैंक मर गए थे? आपके पास और कोई बैंक नहीं है। अच्छा आपका सेलेरी एकाउंट है। कितनी सेलरी मिलती है। आज तक तो आपने हफ्ता दिया नहीं। हम कैसे मान लें कि आपको सेलेरी मिलती। क्या सबूत है। आप क्या काम करते हैं। इस काम के लिए इतनी सेलेरी नहीं मिलनी चाहिए। आपके पैसे कौन से ए टी एम से निकले। वह ए टी एम कौन से इलाके में आता है। ए टी एम का थाना कौनसा पड़ता है। अच्छा तो आपके पैसे अमरीका में निकले हैं। वहां कौन से शहर से निकले। कौन सा मोहल्ला था। वहां थाना कौन सा लगता है। उस थाने के एस एच ओ का नाम क्या है। जब आप गए नहीं तो आपके पैसे वहां से कैसे निकल गए। इससे लगता है आप साफ-साफ झूठ बोल रहे हैं। बाकी सब तो ठीक है। लेकिन हम आपको इस झूठ के लिए कम से कम दो दिन पुलिस कस्टडी में भेज सकते हैं। जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो जाए।
आप भागते हैं। कहते हुए थाने से निकल जाते हैं। मुझे कोई मदद नहीं चाहिए। यही तो बैंक वाले और पुलिस वाले चाहते हैं। रिश्तों की जमा पूंजी आप जमा करते रहे और आपके पैसे तीसरा उड़ाता रहे। आप उसकी शिकायत नहीं करें। डिजिटलीकरण तब ही हो सकता है जब अंधाकरण बंद हो जाए।

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