दिल्ली , मैं और तुम

Posted by Pari Verma
April 5, 2017

Self-Published

आज भी याद है मुझे , बहुत सारे सपनों के साथ हम दोनों दिल्ली के लिए उस रात को हलकी ठण्ड में निकले थे. जैसे लग रहा था, कि बस अब ज़िन्दगी में बहुत कुछ जीत जायेंगे. सपने सच में बहुत अनमोल होते हैं. आँखों के साथ जब वो ही सपने दिमाग और दिल में भी जगह लेने लगते हैं तो वो और कीमती हो जाते हैं.

दिल्ली की उस हल्की – हल्की ठण्ड में हम एक दुसरे का हाथ पकड़कर जब अनजान गलियों में भटकते थे तब लगता था कि यही है वो पल जिसके लिए हम जीते आये हैं. बहुत कोशिश की एक प्राईवेट नौकरी के लिए लेकिन असफल रहे हम. फिर भी न हारने का जज़्बा और एक दूसरे के साथ में हम ,लोगों के अन्दर प्यार को और मजबूत किया, भले ही ज़माना हमें पागल कहे, पर मुझे और तुम्हें पता है कि ये मुहब्बत है मेरे यार ! जो कि सिर्फ जीते जाने का नाम है और हम जी रहे हैं.

 

शिखा परी

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