मीडिया को सोच बदलने के साथ विकेंद्रीकृत होने की जरुरत

Posted by Sushant Mishra
April 17, 2017

Self-Published

आज देश में अपने धर्म को सर्वश्रेष्ठ साबित करने की होड़ सी मची हुई है. हर धर्म के ठेकेदार हर दिन कोई नया ड्रामा शुरू कर देते हैं और इससे कुछ होता नहीं है बस कुछ समाचार वालों को एक मसाला मिल जाता है जिससे उनकी रोटियां सिक जाती है. मीडिया का स्तर इतना निचा गिरता जा रहा है कि लोग भाषाई मर्यादा तक भूल गये हैं. वहीँ जब कभी टीवी डिबेट देखने भी बैठता हूँ तो देखकर ऐसा लगता है कि किसी मच्छली बाज़ार में बैठा हूँ,न तो कोई तर्कसंगत बात करता है न एंकर के पास वैसी कोई बात कहने की हो जिससे आम आदमी को कोई सूचना मिले. वहीँ फटाफट खबरें में एक ही खबर को दस लाइन में तोड़कर 10 खबर बना दिया जाता है, जैसे उन्हें एक टारगेट मिला हुआ हो. अगर उसी खबर को ठीक ढंग से प्रस्तुत किया जाये तो भी लोग पसंद करेंगे. दूसरी तरफ मीडिया का विकेंद्रीकरण काफी जरुरी है. पिछले बीस दिनों से देख रहा हूँ कि योगी और मोदी के अलावा कोई खबर ही देखने को नहीं मिलती. अरे भाई देश में और भी राज्य है जहाँ पर सरकारें चलती हैं और वहां भी मुख्यमंत्री बने हैं और वो भी काम कर रहे हैं. देश में और भी समस्याएं हैं उसे दिखने वाला कोई नहीं है. आज जिस हिसाब से पत्रकारिता को स्तर गिरता जा रहा,इससे इस जगत को काफी नुकसान हो रहा है. बाजारवाद और पूंजीवाद के कारण इसकी जड़ें खोखली कर दी है.भले ही आपको कोई खबर सबसे तेज दिखा और बता दे पर उसकी विश्वसनीयता पर अब मन में सवाल उठते हैं.

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