यह कोई माल्या नही है, यह हमारा किसान है, अन्नदाता है।

Posted by Deepak patidar
April 11, 2017

Self-Published

माफ़ कीजियेगा शायद बात अच्छी न लगे या कडवी लगे तो। ” आप पढ़ रहें हैं देश का सबसे विश्वसनीय अखबार “, इस तरह की टैग लाइन वाले एक विश्वसनीय समाचार पत्र की पहली और सबसे मुख्य खबर हे IPL10 में हुए एक मैच की, वहीँ अगर आप आगे पढ़ पायें तो सबसे आखिर वाले पेज में अन्दर की तरफ निचे एक छोटी सी खबर होगी जिसमे कुछ किसान कर्ज माफ़ी की मांग कर रहे हैं।

शायद आपको इस बात से ज्यादा फर्क न पड़ता हो मगर मुझे इस खबर ने झकझोर दिया। कहने को भारत एक कृषि प्रधान देश है, और जब बात उनकी दुर्दशा पर विचार करने की आये तो कोई नही बोलता। कोई बात करना ही नही चाहता। किसी के पास time नही है। किसी को IPL देखना है किसी को राजनीती पर बहस।

यह किसान है भी इसी लायक, जाहिल और अनपढ़ है।एसा मैं इस लिए कह रहा हूँ क्यूंकि इन्हें लगता है की यूँ कुछ दिन प्रधानमंत्री के सामने भूखे नंगे बैठने से किसी को इन पर दया आ जाएगी या कोई इनकी मदद के लिए आन्दोलन चल पड़ेगा तो फिर यह सब जाहिल ही हे, जाइये कुछ बसे तोडिये, कुछ थाने जलाइये, पत्थर उठा लीजिये। पिछले दिनों बैंक से जुड़ी एक बड़ी सख्शियत का बयान आया था की किसानो का कर्ज माफ़ किये जाने से भारत सरकार की आर्थिक स्थिति पर बुरा असर पड़ेगा। मैं आपसे एक बात पूछना चाहता हूँ की जब बड़े बड़े नामी उद्योगपतियों का कर्ज माफ़ किया जा सकता है तो किसानो का क्यों नही..?

पिछले हफ्ते हमारी उसी भारत सरकार जो अपनी आर्थिक स्थिति बिगड़ने का बहाना बना रही है, उसने बांग्लादेश को 450 करोड़ dollar का कर्ज देने को मंजूरी दी है।

तमिलनाडु के किसान पिछले 145 साल का सबसे सुखा मानसून झेल रहे हैं।

अकेले तमिलनाडु में पिछले एक वर्ष में 200 से अधिक किसान आत्महत्या कर चुके हैं।

तमिलनाडु में ऒसतन हर किसान 8 लाख का कर्ज है।

और एक बात मान लीजिये की युहीं कोई आत्महत्या नही करता। हमारे देश में कुछ लोग हजारो करोड़ का कर्ज खाकर चुकाने की बारी आने पर विदेश भाग जाते हैं। सरकार उनसे हाथजोड़ कर, और उन्हें कर्ज में छुट देने का वादा कर उन्हें वापस बुलाने की कोशिश करती है।

“सोचिये कुछ इनके लिए भी, जय जवान जय किसान को सार्थक बनाये रखिये”

~ दीपक पाटीदार

  1. 11.04.2017

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