‘योगी लीला’ पर ‘द्वापर के रोमियो’ श्रीकृष्ण को पत्र

Posted by SwastikTejasvi in Hindi, Society, Staff Picks
April 3, 2017

धन्य हैं प्रभु!

आप की लीला अपरंपार है। मान गए महाराज आज आपको। आप अंतर्यामी तो थे ही बुधियार भी निकले। आपको पता था कलियुग में एक महापुरुष होगा जो भगवा वस्त्र और भगवा विचारधारा धारण कर आएगा और सबको अज्ञानता से ज्ञान की ओर ले जाएगा। भारतीय गरिमा और परम्परा का महान रक्षक होगा।

आप तो काफी समझदार निकले द्वापर में ही रासलीला कर निकल लिए। सोलह हजार गोपियां को नचा लिए। आपको पता था कलियुग में मथुरा और वृन्दावन उसके प्रदेश यानि उत्तर प्रदेश में आ जाएगा। इसलिए आप द्वापर में ही रास समाप्त कर और लीला समेट कर फैमिली मैन होकर हस्तिनापुर शिफ्ट हो लिए। लेकिन उनका क्या जो कलियुग में आपके नक़्शे कदम पर चल रहे हैं। जो आपकी परम्परा का निर्वाह कर रहे हैं।

उन जोड़ों का क्या प्रभु जो आपके प्रदेश में कलयुग में पैदा हुए? उनके लिए भगवाधारी इस युग प्रवर्तक ने तो ‘एंटी-रोमियो स्क्वाड’ बना डाला है। उनसे दौड़ा दौड़ा कर हिसाब लिया जा रहा है। प्रभु!दुःख मुझे इस बात का नहीं है कि निगरानी बड़ी तबीयत से की जा रही है। और इन प्रेम के पंछियों यानि तोते मैनों को कोई स्पेस नहीं दिया जा रहा। परंतु दुःख इस बात का है, की सीटी मारने वालों ,तंज कसने वालों और ईव टीजिंग वालों को अभी भी खुल्ली छूट है। खबर हमें भी यहीं तक मालूम थी। आगे जो हम आपसे शेयर करेंगे वो हमें भी हमारे प्रोजेक्ट मीटिंग के टाइम आज ही हमारे मेंटर(नाम जाने दीजिए) जिनके एस. पी. मित्र ने फ़ोन किया से ज्ञात हुआ तो हम तो छटपटा गए एकदम से क्या बताएं आपको।

हाँ तो आगे प्रभु,सबसे बड़ा दुःख इस बात का है कि, इस चिलचिलाती दोपहरी में बेचारे स्कूल से आते भाई बहन की अच्छी खातिरदारी हो जा रही है। जो सगे हैं उनकी तो शिनाख्त माँ बाप के नाम से हो जाती है। थैंक गॉड, प्रभु स्कूलों ने सबको आईडी कार्ड दे रखा है। परंतु चचेरे-ममेरे भाई-बहनों का जिनके माँ-बापों के नाम जाहिर हैं अलग-अलग ही होंगे, उनका हिसाब वहां की ‘एंटी-रोमियो स्क्वॉड’ और पुलिस बड़े तहेदिल से ले रही है। स्कूल में जो मास्साब सीबीएसई के लोचा के कारण नहीं कर पा रहे उसे ये लोग बड़ी मुस्तैदी से निभा रही है। उन्हें जो दुखहरण(डंडे), गुंडे, मवालियों के लिए दिया गया है। उसका उपयोग अपने बीवी के लड़ाई का गुस्सा और ब्लडप्रेशर कम करने के लिए बेचारे बच्चों पे बरसा कर रहे हैं। घोर कलियुग आ गया प्रभु।

बढ़िया है आप सुदामा के साथ पढ़ के पास आउट हो लिए। कहीं आज के इस जमाने में सुभद्रा के साथ स्कूल जाना होता तो आपकी भी खैर नहीं थी। खैर छोड़िए जो बीत गई सो बात गई। प्रभु आप मुँहबोली बहन द्रौपदी की लाज तो आप बचा ले गए। लेकिन आज फिर परीक्षा की घड़ी आन पड़ी है। इन भाई बहनों को बचा लीजिए। इस मुस्तैदी के चक्कर में बेचारे भाई बहन साथ जाना छोड़ न दें। आप तो गाय रखते थे और अंतर्यामी थे तो लॉस्ट एंड फाउंड का मामला नहीं आया। मुझे जहाँ तक याद आ रहा है ये पुलिसवाले इतनी मुस्तैदी आखिरी बार भैंसिया खोजने में दिखाए थे। वही प्रभु आजम खान वाला। आपसे कौनो चीज छुपा थोड़ी न है।

प्रभु हम भी कभी कभार गाज़ियाबाद अंसल प्लाजा में सनिमा हो आते थे। अब तो हम दिल्ली के बॉर्डर तक ही वो भी फूक फूक कर कदम रखते हैं। हमारी छोड़िए, पर इन चचेरे ममेरे भाई बहनों के केस पर अगर बिजी शेड्यूल में से टाइम मिले तो एक नजर दीजिएगा। किसी और से कहे नहीं की फिर लेफ्ट-राइट का लोचा हो जाएगा और मुझे टैगवाद से एलर्जी है। परेशानी के लिए क्षमा कीजिएगा बात ही ऐसा है कि बर्दाश्ते नहीं हुआ।
आपका फ़रियादी
नाम तो जानते ही हैं प्रभु
P. S. – नाम लिखेंगे तो कौनो द्रोह लगाकर हमरे उप्पर भी कउनो धारा चिपका दिया जाएगा। बाँकी आप तो खुदै समझदार हैं।

फोटो आभार – देबराया मुखोपाध्याय

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