राज घरानों की शान हुआ करती थीं नर्तकियां, आज ले चुकी है वेश्यावृति का रूप

Posted by Kumar Prince Mukherjee
April 29, 2017

Self-Published

Prostitution in India
Prostitution in India.

ऐसा कहा जाता है कि स्त्री कभी खुले आसमान में आजादी की उड़ान नहीं भर सकती हैं। समाज के अंदर की बंदिशें स्त्री की सीमारेखा होती है। महिलाएं इसे लांघने की कोशिश भी नहीं करतीं हैं। लेकिन एक तवायफ पर ये चीजें लागू नहीं होती। वह न सिर्फ स्वतंत्र हैं बल्कि हर प्रकार के सामाजिक और धार्मिक बंधनों से मुक्त होती है। वेश्यावृति को दुनिया का सबसे प्राचीन पेशा कहा जाता है। विश्व स्तर पर वेश्यावृति एक व्यवसाय का रूप ले चुकी है। लेकिन भारत में इसका इतिहास काफी पुराना है।

भारत में ब्रिटिश साम्राज्य से काफी पहले से वेश्यावृति हुआ करती थी। आज के दौर में क्लबों में डांस करने वाली लड़कियों को बार गर्ल्स कहा जाता है। लेकिन 15वीं शताब्दी में इन्हीं बार गर्ल्स का प्रचलन शुरू हो चुका था। उस दौर में बार गर्ल्स राजमहलों की शान हुआ करती थीं।

Prostitution
Girls stand outside the red-light zone, Sonagachhi.

प्राचीन समय में राजा-रजवाड़े और शाही घराने के लोग “खड़ी महफिलों” में इन बार गर्ल्स को न्यौता देते थे। इतिहासकारों की माने तो एक दौर हुआ करता था जब मुगल, ब्रिटिश शासक और हिन्दू राजा-महाराजा इन नर्तकियों के कदरदान हुआ करते थे। लेकिन 19वीं सदी के आरंभ में इन स्त्रियों से उनका मान-सम्मान छिनने लगा।

इतिहास में इस बात का जिक्र है कि 16वीं शताब्दी में इन नर्तकियों को राजशाही ठाठ प्राप्त था। इनके ईर्द-गिर्द कोई आम व्यक्ति भटक भी नहीं सकता था। इतना ही नहीं राजा-महाराज केवल इनके नृत्य का आनंद उठाते थे। इन्हें छुने की कोशिश तक नहीं करते थे।

ब्रिटिश सरकार के आते ही इन नर्तकियों के बुरे दौर का आगाज हो गया। अंग्रेज जब भी इन नर्तकियों का डांस देखते थे तो इनके मुरीद बन जाते और इनके साथ रात व्यतित करने की इच्छा जाहीर कर देते थे। धन का लोभ देकर वे इन्हें अपने घर बुलाते और फिर पूरी रात जिस्मानी संपर्क कायम करते थे।

ब्रिटिश साम्राज्य में धीरे-धीरें इन नर्तकियों ने धन के लालच में अपना जिस्म बेचना शुरू कर दिया और इस इन नर्तकियों ने वेश्या का दर्जा प्राप्त कर लिया। नृत्य का पेशा वेश्यावृति में तब्दील हो गया।

Brothel
Prostitutes in a Brothel

ब्रिटिश सरकार के शासन के दौरान वेश्यावृति अपनी सीमा को लांघ चुका था। अग्रेज इन महिलाओं को अपनी प्राइवेट पार्टी में बुलाते थे और फिर पार्टी के बाद महिलाओं को मेहमानों के सामने पेश कर देते थे।

महिलाओं को इसमें कोई ऐतराज नहीं होता था क्योंकि उन्हें भी ब्रिटिश सरकार से सपोर्ट और धन लाभ दोनों हांसिल हो जाता था।

धीरे-धीरे वेश्यावृति आम लोगों के बीच भी अपने पैर पसारने लगा। आम लोगों में भी उन्हें देखने की ललक जागी। अब इन वेश्याओं का स्थान केवल सरकारी बाबुओं की ताजपोशी भर ही सिमट कर नहीं रह गई बल्कि ये नर्तकी बड़े घरानों की पार्टियों में भी जाने लग गईं।

18वीं सदी में इन नर्तकियों के संगठन भी बने। 1773 से लेकर 1912 तक अंग्रेजों की राजधानी रहे कोलकाता में भी वेश्यावृति का अड्डा बन गया। कोलकाता में आए दिन कोई न कोई कोठा खुलने लगा और महिलाएं पैसों के लालच में इस पेशे का हिस्सा बनती चली गईं।

आज ये नर्तकियां वेश्यावृति का रूप ले चुकी है। देश के अलग-अलग इलाकों में कोठे चलाए जा रहे हैं जहां बड़े शान से जिस्मफरोसी का बाजार फल-फुल रहा है।

Youth Ki Awaaz is an open platform where anybody can publish. This post does not necessarily represent the platform's views and opinions.