राम को सब चाहते हैं, राम बनना कोई नहीं चाहता

Posted by Gaurav Pandey
April 7, 2017

भक्ति का जुनून सब सर पे ले के नाच रहे हैं, सबकी एक ही इच्छा है, एक ही मांग है कि अयोध्या में राम मंदिर जरूर बनना चाहिए, फिर इसके लिए कुछ भी क्यों न करना पड़े। एक सज्जन मिले जो राम मंदिर बनने के प्रबल समर्थक थे, उनसे कुतूहलवश पूछ लिया कि राम मंदिर क्यों बनना चाहिए? बोले कि क्या फायदा ऐसे हिन्दू होने का जो अपने भगवान को उनका घर ही न दिलवा सके। अरे… तुम इतने बड़े हो गए कि भगवान को घर दिलवाने में मदद करोगे? जिसने तुमको जन्म दिया उसे अपना घर बनाने को तुम्हारा सहारा चाहिए होगा? और दूसरी बात नारा लगाते हो कि ‘एक ही नारा एक ही नाम, जय श्री राम, जय श्री राम’। अमां एक क्वालिटी तो कोई अपना लो श्री राम की। राम सिर्फ राम नहीं हैं, पुरुषोत्तम हैं, वो एक उदाहरण हैं कि इंसान को कैसा होना चाहिए, किस तरह आचरण करना चाहिए। वो तुमसे होता नहीं, चले हो भगवान को उनका अधिकार दिलाने। हर जगह ठेकेदारी। लड़की हम छेड़ेंगे, शराब हम पियेंगे, लड़ाई-झगड़ा किये बिना मन नहीं मानता और भक्त हैं श्री राम के। भइया, खाली भगवा टीशर्ट पहनने या जय श्री राम के नारे लगाने और मंदिर वहीं बनाएंगे कहने भर से श्री राम खुश ना हो रहे। मैं मंदिर की बात नहीं करता क्योंकि मुझे मालूम है कि उस योग्य मैं हूं ही नहीं, न आचार वैसे हैं और न विचार।
आप सब भी जो दो पेग लगाकर भक्त बन जाते हैं और मंदिर बनाने के लिए काटने-पीटने की बात करने लगते हैं इस बात को समझें कि राम मंदिर में नहीं हृदय और मष्तिष्क में रहना चाहते होंगे, चाहते होंगे कि हर व्यक्ति राम बने। जब राम को समझ जाएंगे उस दिन राम के नाम पे हिंसा का विचार दिमाग में आएगा ही नहीं।
खैर… राम भजो जी, राम भजो जी…

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