विलासिता और ठसक का पर्याय गाड़ी पर लाल बत्ती

Posted by Aditya Gupta in Hindi, Society
April 24, 2017

सुप्रीम कोर्ट ने 2010 में लाल/नीली बत्ती के प्रयोग को हास्यास्पद और शक्ति प्रदर्शन का प्रतीक बताया था… !
हाल ही में सरकार ने आधिकारिक वाहनों पर से लाल-नीली बत्ती हटाने का आदेश दिया है ! कैबिनेट द्वारा लिए गए इस फैसले के अनुसार 1 मई से पांच कैटेगरी के शासकों जिनमे प्रधानमंत्री,राष्ट्रपति,उप-राष्ट्रपति,मुख्य-न्यायाधीश,लोकसभा-स्पीकर,संघ के मंत्रियों,राज्य के मुख्यमंत्री एवम् कैबिनेट मंत्रियों,तथा सभी नौकरशाहों व न्यायाधीशों के वाहनों पर लाल/नीली बत्ती की सुविधा खत्म कर दी गई है । सरकार ने इस कदम का उद्देश्य देश से वीआईपी कल्चर को खत्म करना बताया है ।

गौरतलब है कि लाल-नीली बत्ती की बहस और ऐसे निर्णय नए नहीं हैं इससे पहले दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार व पंजाब और यूपी की नवनिर्वाचित सरकारों ने भी राज्यों में इन बत्तियों के उपयोग पे पाबंदी लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने 2010 से लेकर कई बार इसपर निर्देश दिए हैं। कोर्ट द्वारा इन बत्तियों के प्रयोग को हास्यास्पद और शक्ति प्रदर्शन का प्रतीक बताया गया था और इसके दुरुपयोग पे चिंता जताई थी, साथ ही सरकार को निर्देश दिया था कि सिर्फ संवैधानिक पदों पे आसीन लोगों को ही इसके प्रयोग की अनुमति होनी चाहिए। 2013 में कोर्ट ने लिस्ट जारी कर उन पदों के नाम घोषित किये जो इसका प्रयोग कर सकते हैं और राज्यो से इस संबंध में कानून बनाने की बात की थी किन्तु ये सभी प्रावधान सही तौर से लागू नहीं हुए। ऐसे में अब केंद्रीय मोटर वाहन एक्ट, 1989 के इस कानून को खत्म करना वीआईपी कलचर के अंत की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है !

समाजसेवा बनाम शक्ति-प्रदर्शन :

15 अगस्त रात 12 बजे ,स्वतंत्रता की पूर्व- संध्या पे दिए गए अपने प्रसिद्ध भाषण में प्रधानमंत्री नेहरू ने उस क्षण को “नियति से साक्षात्कार” बताया था और ऐसे समाज और देश के निर्माण का संकल्प लिया था जिसमे गरीबी, अन्याय,अशिक्षा, भूख, गैरबराबरी, छुआछूत और अंधविश्वास के लिए कोई जगह न हो ! उन्होंने इस पवित्र उद्देश्य के लिए सेवा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा था :

“हम सब,चाहे किसी भी धर्म के हों,भारत के बच्चे हैं और हमें बराबर अधिकार,अवसर,विशेषाधिकार और जिम्मेदारियां प्राप्त हैं। हम अपनी मातृभूमि के प्रति निष्ठा व्यक्त करते हैं और इसकी सेवा हेतु संकल्प लेते हैं !”

इस सेवाकार्य में नेताओ, मंत्रियों, नौकरशाहों, न्यायव्यवस्था और पुलिस की प्रमुख भूमिका है इसीलिए इन्हें जनसेवक कहा गया। इन्हें इस महान कार्य हेतु विशिष्ठ शक्तियां और सुविधाएं भी दी गईं। किन्तु अनेक लोगों ने इन सुविधाओं और विशेषाधिकारों का अनुचित इस्तेमाल करने के साथ साथ अपनी सीमाओं और शक्तियों का अतिक्रमण किया और भ्रष्ट तरीकों से अपने खजाने भरे !

लाल-नीली बत्तियों का भी उद्देश्य जनसेवकों को विशेषाधिकार देने से था जिससे वो अपने कर्तव्यों को बेहतर ढंग से निभा पाएं लेकिन असंख्य उदाहरणों से ये बात बार बार सामने आई कि अनेक जनसेवकों ने इसे सेवा के बजाए स्वार्थ के रूप में अपनाया और इसे सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक बना दिया। कई बार इन बत्तियों की आंड़ में उन्होंने नियम तोड़े, लोगों पर अपनी धौंस जमाई और शक्ति-प्रदर्शन किया! हालात इतने बुरे हो गए कि अयोग्य लोगों ने भी गैर क़ानूनी रूप से इसका प्रयोग शुरू कर दिया और जनता को प्रताड़ित करने लगे !

नौकरशाहों की विलासिता :

मंत्रियो के साथ साथ देश की सबसे प्रसिद्ध और मुश्किल परीक्षा के ज़रिये चुने जाने वाले श्रेष्ठतम मस्तिष्क जिन्हें नौकरशाह कहते हैं, उन्होंने भी बड़े पैमाने पर नीली बत्तियों को अपनी विलासिता और ठसक का पर्याय बना दिया और सेवक से शासक बन गए! आज स्थिति इतनी दूषित और चिंतनीय है कि नौकरशाही जिन्हें वल्लभभाई पटेल ने “भारत का स्टील फ्रेम” कहा था वो अपने उद्देश्य की प्राप्ति से बहुत दूर है ! यहां तक IAS, IPS अधिकारी बनने का ख्वाब देखने वाले अधिकांश युवक/युवतियां इस सेवा में पद,शक्ति,प्रतिष्ठा या नीली बत्ती पाने के लिए जाना चाहते हैं, कुछ चंद ही हैं जिन्हें यह देश और समाज के उत्थान का एक महत्वपूर्ण माध्यम नज़र आता है ।

हाल ही में मैंने आईएएस की तैयारी कर रहे अपने एक मित्र के बारे में सुना तो बड़ा आश्चर्य हुआ। वो फ़िलहाल एक सरकारी बैंक में कार्यरत हैं और कई वर्षों से सिविलसेवा की परीक्षा दे रहे हैं,कुछ दिन पहले उनका विवाह तय किया गया और आईएएस बनकर भविष्य में लोगों के हित में कम करने और कुरीतियों से लड़ने का दम भरने वाले महाशय 20 लाख का दहेज लेकर अपनी बैंक की सरकारी नौकरी को सार्थक कर रहे हैं ! ये हाल आज के अनेक सुशिक्षित युवकों का है जो शिक्षा को केवल पुस्तको तक सीमित मानते हैं और उसे व्यवहार में नहीं लाते ! इन सबके बावज़ूद अभी भी ऐसे अनेक वास्तविक जनसेवक और नौकरशाह हैं जो पूरी ईमानदारी और मेहनत से अपने कर्तव्यों का निर्वाहन कर रहे हैं और देशहित में अपना अमूल्य योगदान दे रहे हैं !

आशा है सरकार का यह कदम देश में न्याय और समानता की भावना को बल देगा और जनसेवकों को अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पित बनाएगा।

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