लाल बत्ती का क्या जाना, जब कंधे पर *भगवा* अगौंछा हो।

Self-Published

आपने कह दिया और हमने मान लिया।


हमारे भारत के दौरे पर अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश आये और समय देख उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपयी जी से पूछा आप भारत के बारे मुझे एक बात बताओ सवाल था *ये जुगाड़ क्या है ??* यह सुन अटल बिहारी ने छमा मांगी और कहा ये भारतीय विरासत है इसके बारे में आपको नहीं बता सकता। एक वो पल था एक आज  का पल है सब बदल गया लेकिन *जुगाड़* का जलवा अभी भी कायम है।





लाल बत्ती छिनी है लेकिन भगवा की आज़ादी नहीं।


प्रधानमंत्री ने घोसना किया की VIP सभ्यता को खत्म कर दिया जाए। लेकिन उसका क्या जो बत्ती के लिए ही राजनीती में कदम जमाये हुए हो। उसका भी जुगाड़ लगा कर तोड़ निकाल लिया है। लाल बत्ती देख गाडी को न रोकना, प्रेस देख गाडी को जाने देना ये अब पुराण हो गया है। अब नया तौर तरीका आजमाया ज रहा है। नए दौर में कुछ इस तरह बदलाव देखने को मिल सकता है।

  • लाल बत्ती         –    भगवा अगौंछा
  • प्रदेश सरकार    –    हिन्दू रक्षा वाहिनी
  • प्रेस                  –     गौ रक्षक 

देखा जाये तो बस कहने को VIP सभ्यता के दौर को विदा किया गया है लेकिन असल में कुछ पुराना हटा कर नया किया गया है। बत्ती को हटाकर भगवा के दौर का प्रचलन आ गया है। लाल बत्ती के लिए बड़ी भाग दौड़ और पैसा खर्च करना होता था या फिर ज्यादा पैसा देकर लालबाग़ से लेना पड़ता था। लेकिन *भगवा अगौंछा* अब हर किसी दूकान पर मिलेगा खरीदिए और जलवा कायम करिये।

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